'रियासत में तुरंत कराए जाएं गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव'
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दस सालों से गुरु्द्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव ना कराए जाने के कारण जम्मू-कश्मीर का सिख समुदाय अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है।
रियासत में सिख समुदाय ने राज्य में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव तुरंत करवाने की मांग की है। श्रीनगर में आल पार्टी सिख कोआर्डिनेशन कमेटी की ओर से यह मांग दोराई गई है।
दरअसल कमेटी के चुनाव पांच साल के अंतराल के बाद होते जबकि सरकार ने दस सालों से कोई चुनाव नहीं कराया है। कमेटी का अंतिम चुनाव 2003 में कराया गया था।
'सरकार के हाथों में खेल रहे कु्छ लोग'
पार्टी के चेयरमैन सरदार जगमोहन सिंह रैना तथा कुछ दूसरे सदस्यों के अनुसार, सरकार कुछ लोगों के हाथों में खेलते हुए चुनाव कराने में जानबूझ कर देरी कर रही है।
इससे पहले भी सरकार से कई बार चुनाव करवाने की अपील की जा चुकी है, लेकिन इस ओर उसका रवैया हमेशा ही नकारात्मक रहा है। सिख नेताओं का कहना था कि पिछले चुनाव 2003 में हुए थे।
नियम के अनुसार पांच साल के बाद चुनाव 2008 में करवाया जाना था, लेकिन दस साल बीत जाने के बाद भी यह मामला लटका हुआ है, जबकि राज्य में सिख समुदाय की ओर से इस संबंध में हमेशा आवाज उठती रही है।
'नोटिफिकेशन के बाद ठंडा पड़ा मामला'
रैना ने अरोप लगाया कि दरअसल जो लोग सिख गुरुद्वारा कमेटियों तथा गुरुद्वारा प्रबंधक बोर्ड पर काबिज हैं, वह सरकार के साथ मिलकर जानबूझ कर चुनाव करवाने के इच्छुक नहीं है।
उनका कहना था कि 15 सितंबर को चुनाव करवाने के लिए कुछ दिन पूर्व नोटिफिकेशन निकाली गई थी, लेकिन चुनाव के आयोजन की प्रक्रिया कहीं दिखाई नहीं दे रही है।
तैयार की गई नई मतदान सूचियों को 16 जुलाई तक उजागर करने के लिए कहा गया था, लेकिन अभी तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ है।
'तुरंत शुरू हो चुनाव प्रक्रिया'
राजनीतिक प्रभाव के चलते कई अधिकारी सिख समुदाय के कुछ लोगों के इशारे पर काम कर रहे हैं और इसी कारण चुनाव को संपन्न करवाने में बार-बार देरी की जा रही है, लेकिन अब इसको सहन नहीं किया जाएगा।
सरकार के इस रवैये से सिख संगत में भारी आक्रोश है। सिख समुदाय चाहता है कि घोषित तिथि पर चुनाव हो और इसकी प्रक्रिया को राज्य में तुरंत शुरू किया जाए।