घुसपैठ के लिए इन कोड का इस्तेमाल करता है लश्कर
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लश्कर ए तैयबा के आतंकी अब नये तरह के कोडों का इस्तेमाल करने लगे हैं। पाकिस्तान के लश्कर आतंकियों ने इस बार भारतीय सरजमीं पर आने का एलान एक पेड़ पर चतुराई से लाल दुपट्टा बांध कर किया और इसके बाद वे हरे दुपट्टा का इंतजार करते रहे।
यह हरा दुपट्टा उनको लेने के लिए आने वाले शख्स का इशारा था। इस नए कोड का खुलासा लश्कर आतंकी शौकत अहमद भट से पूछताछ के दौरान हुआ। भट पर आतंकी गुट और दक्षिण कश्मीर स्थित लश्कर ए तैयबा के कमांडर अबू कासिम से जुड़े होने का आरोप है।
36 वर्षीय भट को 5 अगस्त को उधमपुर (नरसू) में बीएसएफ के काफिले पर हुए हमले के संबंध में गिरफ्तार किया गया है। इस हमले में दो जवान मारे गए थे।
हमले में शामिल दो आतंकियों में से एक मोहम्मद नोमान उर्फ मोमिन जवाबी कार्रवाई में मारा गया था और दूसरे आतंकी मोहम्मद नावेद याकूब को स्थानीय नागरिकों (जीजा-साले) ने जिंदा पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया था।
मेहमान आतंकियों के आने का कोड
भट का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया जाना है। पूछताछ के दौरान भट ने बताया कि बाबा ऋषि जंगल में एक पेड़ पर लाल दुपट्टा बंधा था जोकि मेहमान आतंकियों के आने का कोड था। यह जगह जीपीएस में चिन्हित थी।
जांच कर्ताओं को लश्कर आतंकियों के मददगार ने बताया कि उसने लाल दुपट्टे वाले पेड़ पर हरा दुपट्टा बांधा था जोकि आतंकियों के लिए संकेत था कि उनको लेने के लिए कोई आ गया है।
सूत्रों का कहना है कि भट नावेद, मोमिन, अबू ओकाशा और जहारगाम उर्फ मोहम्मद भाई को लेने जाने में देरी से पहुंचा। इसके चलते चारों आतंकियों को दो दिन तक बाबा ऋषि जंगल में ही रहना पड़ा।
दो दिन बाद इन आतंकियों को भट की ओर से संकेत मिला कि वह इन्हें लेने पहुंच गया है। लश्कर के लिए काम करने के साथ ही भट ने उन दो घटनाओं का भी जिक्र किया जब वह पुलिस और सेना की पकड़ में आते-आते बचा था, उस वक्त वह चार आतंकियों को दक्षिण कश्मीर से उत्तर कश्मीर लेकर जा रहा था।