Ramban Landslide: सिर्फ 25 मिनट की बारिश और रास्ता हो गया लापता; रामबन में फिर भूस्खलन, छह घंटे बंद रहा हाईवे
रामबन में 20-25 मिनट की भारी बारिश के बाद भूस्खलन से जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे छह घंटे तक बाधित रहा। एनएचएआई ने रात साढ़े आठ बजे तक मलबा हटाकर मार्ग बहाल किया, फिलहाल छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है।
विस्तार
रामबन में भारी बारिश के बाद चंबा सेरी कलवर्ट में भूस्खलन से जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे छह घंटे बंद रहा। शुक्रवार दोपहर करीब 2:30 बजे से जम्मू-श्रीनगर के बीच जगह-जगह वाहन फंसे रहे। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) और प्रशासन ने कर्मचारियों और मशीनरी की मदद से रात करीब साढ़े आठ बजे तक मलबा हटाकर हाईवे बहाल कर दिया।
हालांकि, पहले रास्ते में फंसे हल्के वाहनों को दोनों तरफ से निकाला जा रहा है।शुक्रवार दोपहर बाद करीब दो बजे रामबन क्षेत्र में अचानक बारिश शुरू हुई। करीब 20 से 25 मिनट तक भारी बारिश के बाद मलबा नेशनल हाईवे पर पहुंच गया। हाईवे बाधित होने से श्रीनगर जाने वाले वाहनों को जखैनी चौक के पास रोक लिया गया।
श्रीनगर से जम्मू आ रहे वाहनों को सेरी और भनियाल रोके रखा। नेशनल हाईवे पर बड़ी तादाद में रसद लेकर जा रहे ट्रक भी फंसे रहे। जम्मू से श्रीनगर जाने वाले वाहनों को उधमपुर, नाशरी और रामबन के सुरक्षित क्षेत्रों में खड़ा कर दिया गया।
19 अप्रैल को हुआ था भूस्खलन, एक सप्ताह तक बंद रहा था हाईवे
इससे पहले 19 अप्रैल को इसी क्षेत्र में भयानक तबाही हुई थी। इस घटना के बाद नेशनल हाईवे करीब एक हफ्ते के लिए बंद रहा था। एनएचएआई ने पहले एकतरफा मार्ग को बहाल किया था। लेकिन इसके बाद मार्ग को पूरा बहाल करने के लिए एक दिन की ब्रेक ली गई थी।
हाईवे बाधित रहने के बाद ट्रेडिंग कंपनियों ने रोजाना करीब 20 करोड़ रुपये के नुकसान की बात कही थी। रामबन में करीब चार किलोमीटर के हिस्से में भूस्खलन की स्थिति बनी हुई है। हल्की सी बारिश के बाद पहाड़ से मलबा आने शुरू हो जाता है और शुक्रवार को भी नेशनल हाईवे इसी घटनाक्रम का शिकार हुआ है। नेशनल हाईवे बाधित होने के बावजूद डोडा, किश्तबाड़ और भद्रवाह समेत दूसरे क्षेत्रों को जाने वाले वाहनों की आवाजाही जारी है।
यह खबर भी पढ़ें: दुल्हन पाने के लिए पैदल चला दूल्हा: भूस्खलन भी नहीं रोक पाया कदम, समय पर सजी रामबन की बरात
बारिश के बाद नेशनल हाईवे बाधित हुआ है। नेशनल हाईवे पर आधा दर्जन जेसीबी मशीनें और टिप्पर की मदद से मलबा हटा दिया गया है। सबसे पहले हल्के वाहनों को दोनों तरफ से जाने की अनुमति दी गई है।- पुरुषोत्तम कुमार, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई
यह खबर भी पढ़ें: जम्मू-कश्मीर में लैंडस्लाइड की तीन घटनाएं: भूस्खलन और बाढ़ ने मचाई तबाही, कई परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़