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Jammu News: एक सप्ताह पहले दरारें नजरअंदाज, अब रणबीरेश्वर मंदिर का एक हिस्सा ढहा
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बारिश के बीच 200 साल पुराने प्राचीन श्री रणबीरेश्वर मंदिर शालामार के मुख्य द्वार के आगे बरामदे का एक हिस्सा ढह गया। हादसा मंगलवार सुबह करीब 9:15 बजे हुआ। गनीमत रही कि घटना के दौरान कोई श्रद्धालु नहीं था। गर्भगृह के सामने स्थापित विशेष धातु से नंदी की प्रतिमा व छोटे शिवलिंग क्षतिग्रस्त हो गए। प्रथम दृश्यता हादसे का कारण समय पर मरम्मत न होना सामने आ रहा है। इस बात की भी चर्चा है कि आकाशीय बिजली गिरने से घटना हुई है। वहीं, 15 दिन पहले वास्तुकार ने सर्वेक्षण किया था, जिसमें किसी भी प्रकार का खतरा नहीं होने की बात कही थी। इसके बावजूद हिस्सा ढह जाना सर्वे पर कई सवाल खड़े कर रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि एक सप्ताह पहले ढहे हिस्से पर दरारें देखी थी, लेकिन प्रबंधन द्वारा काम नहीं करवाया गया।
घटनास्थल पर एसडीआरएफ की 30 सदस्यीय टीम ने सबसे पहले देखा कि मलबे के नीचे कोई दबा तो नहीं है। इसके बाद नंदी की प्रतिमा को मलबे से बाहर निकाला। इस बीच फिर बारिश शुरू हो गई जिससे कार्य में बांधा आई। टीम ने करीब चार घंटे तक अभियान चलाया। सारा मलबा गर्भगृह के सामने गिरा है। इसके कारण पहली मंजिल पर बने भवनों में दरारें आ गईं। जम्मू-कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट के अधिकारियों ने भी हालात का जायजा लिया। जांच के लिए कमेटी गठित करने की तैयारी है, जो हादसे के कारण व अन्य जरूरी मरम्मत कार्यों की रिपोर्ट तैयार करेगी। अब ट्रस्ट ने पुनर्निर्माण के लिए फिलहाल कुछ समय तक मंदिर बंद रखने का फैसला लिया है।
लगा था दीवार का प्लास्टर उखड़ा है...
श्रद्धालु भूपेश्वर सिंह जम्वाल ने कहा कि प्रतिदिन मंदिर में पूजा-अर्चना करने आता हूं। मंगलवार सुबह सात बजे जलाभिषेक और दर्शन किए। एक सप्ताह पहले ढहे हिस्से पर दरारें देखी थी। उस दौरान लगा था कि दीवार का प्लास्टर उखड़ा है। प्रबंधन को चाहिए कि जरूरी मरम्मत करवाए। रघुनाथ सेवा समिति के उपाध्यक्ष प्रीतम शर्मा ने कहा कि 2019 में मंदिर के विभिन्न हिस्सों में दरारें आई थीं। ट्रस्ट ने मरम्मत के बजाय नया कार्य शुरू करवा दिया। आरोप लगाया कि धर्मार्थ ट्रस्ट से मंदिरों का रखरखाव नहीं हो रहा। सरकार को चाहिए कि वह मंदिरों का अपने अधिकार क्षेत्र में लें। बजरंग दल जम्मू कश्मीर के अध्यक्ष राकेश बजरंगी ने आरोप लगाया कि धर्मार्थ ट्रस्ट मंदिर की सुरक्षा में असफल रहा।
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आकाशीय बिजली गिरने के कारण हादसा हुआ है। अभी टाइलें बिछाई जा रही थी। प्रतिदिन हजारों लीटर पानी की पर्याप्त निकासी के लिए भी काम चल रहा है। इस हिस्से को कोई खतरा नहीं था। फिर से वास्तुकार से सर्वे करवाएंगे। कार्य पूरा करने के बाद मंदिर भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा।
आरएस लंगेह, अध्यक्ष, जम्मू-कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट
हादसा दुखद है। जांच के लिए समिति बनाएंगे। ट्रस्ट के अधीन चलने वाले सभी मंदिरों का ऑडिट करवाया जाएगा।
-एमके अजातशत्रु सिंह, मुख्य ट्रस्टी
30 सदस्यीय टीम ने मौके पर जांच की। कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। इमारत काफी पुरानी है। प्राथमिक जांच में मिट्टी में नमी मिली है। हिस्सा ढहने का कारण बारिश या अन्य कुछ भी हो सकता है।
-जाहिद मन्हास, सीईओ, एसडीआरएफ
मंदिर की आयामी स्थिरता की समय पर जांच होनी चाहिए थी। पता चला है कि खुदाई हो रही थी। इससे भी ढांचे को नुकसान पहुंचने की संभावना है। निगम के दायरे में प्राचीन मंदिरों की आयामी स्थिरता की जांच के लिए आदेश जारी किया जाएगा।
-राजिंदर शर्मा, मेयर
इतिहास - महाराजा रणबीर सिंह ने श्री नाथ गिरी महाराज से प्रेरित होकर 1883 में मंदिर का निर्माण करवाया था। उन्हीं के नाम पर मंदिर है। उत्तर भारत में सबसे ऊंचा आठ फीट शिवलिंग है। 12 और शिवलिंग हैं जो क्रिस्टल के हैं। इनकी ऊंचाई 15-38 सेंटीमीटर के बीच है। मंदिर के अंदर दोनों ओर एक स्लैब है, जिसमें नर्मदा नदी से लाए शिवलिंग हैं।
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जम्मू। बारिश के बीच 200 साल पुराने प्राचीन श्री रणबीरेश्वर मंदिर शालामार के मुख्य द्वार के आगे बरामदे का एक हिस्सा ढह गया। हादसा मंगलवार सुबह करीब 9:15 बजे हुआ। गनीमत रही कि घटना के दौरान कोई श्रद्धालु नहीं था। गर्भगृह के सामने स्थापित विशेष धातु से नंदी की प्रतिमा व छोटे शिवलिंग क्षतिग्रस्त हो गए। प्रथम दृश्यता हादसे का कारण समय पर मरम्मत न होना सामने आ रहा है। इस बात की भी चर्चा है कि आकाशीय बिजली गिरने से घटना हुई है। वहीं, 15 दिन पहले वास्तुकार ने सर्वेक्षण किया था, जिसमें किसी भी प्रकार का खतरा नहीं होने की बात कही थी। इसके बावजूद हिस्सा ढह जाना सर्वे पर कई सवाल खड़े कर रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि एक सप्ताह पहले ढहे हिस्से पर दरारें देखी थी, लेकिन प्रबंधन द्वारा काम नहीं करवाया गया।
घटनास्थल पर एसडीआरएफ की 30 सदस्यीय टीम ने सबसे पहले देखा कि मलबे के नीचे कोई दबा तो नहीं है। इसके बाद नंदी की प्रतिमा को मलबे से बाहर निकाला। इस बीच फिर बारिश शुरू हो गई जिससे कार्य में बांधा आई। टीम ने करीब चार घंटे तक अभियान चलाया। सारा मलबा गर्भगृह के सामने गिरा है। इसके कारण पहली मंजिल पर बने भवनों में दरारें आ गईं। जम्मू-कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट के अधिकारियों ने भी हालात का जायजा लिया। जांच के लिए कमेटी गठित करने की तैयारी है, जो हादसे के कारण व अन्य जरूरी मरम्मत कार्यों की रिपोर्ट तैयार करेगी। अब ट्रस्ट ने पुनर्निर्माण के लिए फिलहाल कुछ समय तक मंदिर बंद रखने का फैसला लिया है।
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लगा था दीवार का प्लास्टर उखड़ा है...
श्रद्धालु भूपेश्वर सिंह जम्वाल ने कहा कि प्रतिदिन मंदिर में पूजा-अर्चना करने आता हूं। मंगलवार सुबह सात बजे जलाभिषेक और दर्शन किए। एक सप्ताह पहले ढहे हिस्से पर दरारें देखी थी। उस दौरान लगा था कि दीवार का प्लास्टर उखड़ा है। प्रबंधन को चाहिए कि जरूरी मरम्मत करवाए। रघुनाथ सेवा समिति के उपाध्यक्ष प्रीतम शर्मा ने कहा कि 2019 में मंदिर के विभिन्न हिस्सों में दरारें आई थीं। ट्रस्ट ने मरम्मत के बजाय नया कार्य शुरू करवा दिया। आरोप लगाया कि धर्मार्थ ट्रस्ट से मंदिरों का रखरखाव नहीं हो रहा। सरकार को चाहिए कि वह मंदिरों का अपने अधिकार क्षेत्र में लें। बजरंग दल जम्मू कश्मीर के अध्यक्ष राकेश बजरंगी ने आरोप लगाया कि धर्मार्थ ट्रस्ट मंदिर की सुरक्षा में असफल रहा।
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आकाशीय बिजली गिरने के कारण हादसा हुआ है। अभी टाइलें बिछाई जा रही थी। प्रतिदिन हजारों लीटर पानी की पर्याप्त निकासी के लिए भी काम चल रहा है। इस हिस्से को कोई खतरा नहीं था। फिर से वास्तुकार से सर्वे करवाएंगे। कार्य पूरा करने के बाद मंदिर भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा।
आरएस लंगेह, अध्यक्ष, जम्मू-कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट
हादसा दुखद है। जांच के लिए समिति बनाएंगे। ट्रस्ट के अधीन चलने वाले सभी मंदिरों का ऑडिट करवाया जाएगा।
-एमके अजातशत्रु सिंह, मुख्य ट्रस्टी
30 सदस्यीय टीम ने मौके पर जांच की। कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। इमारत काफी पुरानी है। प्राथमिक जांच में मिट्टी में नमी मिली है। हिस्सा ढहने का कारण बारिश या अन्य कुछ भी हो सकता है।
-जाहिद मन्हास, सीईओ, एसडीआरएफ
मंदिर की आयामी स्थिरता की समय पर जांच होनी चाहिए थी। पता चला है कि खुदाई हो रही थी। इससे भी ढांचे को नुकसान पहुंचने की संभावना है। निगम के दायरे में प्राचीन मंदिरों की आयामी स्थिरता की जांच के लिए आदेश जारी किया जाएगा।
-राजिंदर शर्मा, मेयर
इतिहास - महाराजा रणबीर सिंह ने श्री नाथ गिरी महाराज से प्रेरित होकर 1883 में मंदिर का निर्माण करवाया था। उन्हीं के नाम पर मंदिर है। उत्तर भारत में सबसे ऊंचा आठ फीट शिवलिंग है। 12 और शिवलिंग हैं जो क्रिस्टल के हैं। इनकी ऊंचाई 15-38 सेंटीमीटर के बीच है। मंदिर के अंदर दोनों ओर एक स्लैब है, जिसमें नर्मदा नदी से लाए शिवलिंग हैं।