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‘जमीन तारबंदी के पार, गुजारा भी दुश्वार’
ब्यूरो, अमर उजाला/सांबा
Updated Thu, 19 Feb 2015 11:13 AM IST
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सीमावर्ती गांव पिंडी कैंप, पिंडी चाढ़का, नंदपुर, दग, जेरड़ा के रहने वालों का जीना दुश्वार हो गया है। स्थानीय किसानों का कहना है कि हमारी आधी जमीन तारबंदी के आगे आ गई है। लेकिन अब तक न तो केंद्र सरकार न ही राज्य सरकार ने कोई मदद की। इस कारण महंगाई के दौर में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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किसानों का कहना है कि जब भी हम आवाज उठाते हैं, तो पटवारी को भेजकर कहा जात है कि जल्द ही मुआवजा दिया जाएगा। पता नहीं वह दिन कब आएगा। किसानोें का कहना है कि मुआवजे का इंतजार करते-करते चौदह वर्ष बीत गए। लेकिन कभी सरकार ने इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया।
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नंदपुर के राजकुमार का कहना है कि मेरे पास चार कनाल जमीन थी, जो बार्डर पर दी थी जो पूरी की पूरी तारबंदी में आ गई। आज तक किसी ने मदद नहीं की। जगातर सिंह, रूपलाल, यशपाल, पिंडी के भगवान सिंह, बांका सिंह, डिप्टी सिंह का कहना है कि अगर सरकार मुआवजा नहीं दे सकती, तो एक बच्चे को सरकारी नौकरी दे, ताकि हम अपना गुजारा कर सकें।
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किसानों का कहना है कि तारबंदी के आगे की जमीन पर कुछ भी नहीं जा सकता है, क्योंकि उस पर अब जंगल है। स्थानीय किसानों का कहना है कि अब सब्र का बांध टूटने लगा है, जल्द समाधान नहीं किया गया, तो हम सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे।