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Jammu News: पुलवामा में मुस्लिमों ने पड़ोसी कश्मीरी पंडित के अंतिम संस्कार में की मदद
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पुलवामा। जम्मू-कश्मीर में मुस्लिम समुदाय ने सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश की। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के पांपोर के मुस्लिमों ने पड़ोसी कश्मीरी पंडित के अंतिम संस्कार में मदद की।
अशोक कुमार वांगू का मंगलवार शाम करीब पांच बजे पांपोर के द्रंगबल में अपने आवास पर निधन हो गया था। पार्थिव शरीर को जम्मू ले जाने के बजाय कश्मीरी पंडित समुदाय ने वहीं अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। बता दें, कश्मीर से पलायन के बाद अधिकतर कश्मीरी पंडितों के परिवार जम्मू में ही बसे हुए हैं।
पड़ोसी राजू भट ने कहा, अशोक कुमार वांगू की मंगलवार शाम करीब 5 बजे मृत्यु हो गई थी। खबर मिलते ही पूरे द्रंगबल मोहल्ले के लोग जुट गए। इनमें मुस्लिम समुदाय भी शामिल था। सभी ने अंतिम संस्कार में मदद की। राजू भट ने कहा, यह हमारे लिए नया नहीं है क्योंकि ऐसा यहां लंबे समय से हो रहा है। सभी समुदाय के लोग हर सुख दुख में एक दूसरे का साथ निभाते हैं। यह कश्मीरियत है।
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पड़ोसी मोहम्मद यूसुफ मलिक ने कहा कि उनका क्षेत्र हमेशा हिंदू-सिख-मुस्लिम एकता के लिए जाना जाता है। मलिक ने कहा, हमें यहां कभी कोई समस्या नहीं हुई। हिंदू, मुस्लिम और सिख सौहार्दपूर्ण ढंग से एक साथ रहते हैं। हम एक-दूसरे के सुख-दुख साझा करते हैं। पंडित समुदाय ने फैसला किया कि वांगू को अंतिम संस्कार के लिए जम्मू नहीं ले जाया जाएगा और यहीं अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसलिए हम सभी मदद के लिए एक साथ आए।
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अशोक कुमार वांगू का मंगलवार शाम करीब पांच बजे पांपोर के द्रंगबल में अपने आवास पर निधन हो गया था। पार्थिव शरीर को जम्मू ले जाने के बजाय कश्मीरी पंडित समुदाय ने वहीं अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। बता दें, कश्मीर से पलायन के बाद अधिकतर कश्मीरी पंडितों के परिवार जम्मू में ही बसे हुए हैं।
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पड़ोसी राजू भट ने कहा, अशोक कुमार वांगू की मंगलवार शाम करीब 5 बजे मृत्यु हो गई थी। खबर मिलते ही पूरे द्रंगबल मोहल्ले के लोग जुट गए। इनमें मुस्लिम समुदाय भी शामिल था। सभी ने अंतिम संस्कार में मदद की। राजू भट ने कहा, यह हमारे लिए नया नहीं है क्योंकि ऐसा यहां लंबे समय से हो रहा है। सभी समुदाय के लोग हर सुख दुख में एक दूसरे का साथ निभाते हैं। यह कश्मीरियत है।
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पड़ोसी मोहम्मद यूसुफ मलिक ने कहा कि उनका क्षेत्र हमेशा हिंदू-सिख-मुस्लिम एकता के लिए जाना जाता है। मलिक ने कहा, हमें यहां कभी कोई समस्या नहीं हुई। हिंदू, मुस्लिम और सिख सौहार्दपूर्ण ढंग से एक साथ रहते हैं। हम एक-दूसरे के सुख-दुख साझा करते हैं। पंडित समुदाय ने फैसला किया कि वांगू को अंतिम संस्कार के लिए जम्मू नहीं ले जाया जाएगा और यहीं अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसलिए हम सभी मदद के लिए एक साथ आए।