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आज का कश्मीर: हिंसा के हालातों से करीगरों की रोजी पर संकट, होने लगा पलायन

Fri, 23 Jun 2017 07:25 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 23 Jun 2017 07:25 PM IST
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kashmiri workers making migration from valley
फाइल फोटो

डल झील के पानी पर तैरने वाले बाजार की रौनक खत्म हो गई है। बाजार में सन्नाटा पसरा है। कालीन और पशमीना के कारोबार को ग्रहण लग गया है। कारोबारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। आमदनी तो दूर पूंजी बचाने का संकट है। कारीगरों की रोजी छिन गई है। हुनरमंद हाथ बेकार हो गए हैं। हालात सुधरने की उम्मीद नहीं दिखती।

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व्यापारी रोज पर्यटकों का इंतजार करते हैं, लेकिन सप्ताह बीत जाता है और बोहनी तक नहीं हो पाती। कारीगरों का पलायन शुरू हो गया है। शिकारे वाले तक रोजगार की तलाश में गोवा और दूसरे राज्यों में जाने लगे हैं। डल झील में पशमीना और कालीन की दुकान चलाने वाले गुलाम कादिर के हुनर का लोहा विदेशी पर्यटक भी मानते रहे हैं।
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गुलाम कादिर अभी जर्मनी में प्रदर्शनी लगाने गए हैं। उनका भाई मुदस्सर अब दुकान संभालता है। मुदस्सर ने कंप्यूटर एप्लीकेशन में स्नातक किया, लेकिन नौकरी नहीं मिली। वह कहता है कि हमारी सुनने वाला कोई नहीं है। पुश्तैनी कारोबार को हिंसा की नजर लग गई है।

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kashmiri workers making migration from valley
फाइल फोटो

उसे पाकिस्तान के प्रति भी गुस्सा है। मुदस्सर ने कहा कि पाकिस्तान तो खुद गया-गुजरा है, वह हमें क्या देगा। कुछ पर्यटक आते हैं और दूसरे दिन कोई घटना हो जाती है। तब कश्मीर आने वाले पर्यटकों को उनके घर से फोन आने लगता है कि वापस आ जाओ। 

पशमीना कारोबार से ही जुड़े सत्तर वर्षीय गुलाम अहमद कहते हैं कि पूरा सीजन बरबाद हो गया। पिछले साल आतंकी बुरहान वानी की मौत से पहले दो महीने सीजन ठीक चला था। इस बार तो शुरू से ही माहौल खराब है। पूरे सीजन में कुछ भी कमाई नहीं हो सकी। दुकान में कम से कम तीन हजार रोजाना का खर्च है।

यह खर्च पूंजी से निकालना पड़ रहा है। कारीगर को ईद में पैसे देने होंगे। उसमें भी पूंजी ही खत्म होगी। अलगाववादियों ने जीएसटी के बारे में भी अफवाह फैला रखी है। गुलाम अहमद कहते हैं कि आमदनी जीरो है और सरकार नया टैक्स लगाना चाह रही है। नया टैक्स लगाया गया तो विरोध बढ़ेगा। संपन्न व्यापारी दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शनी लगाने जाते हैं। छोटे कारोबारियों पर सबसे अधिक मार पड़ी है। 

kashmiri workers making migration from valley
फाइल फोटो - फोटो : File Photo

शिकारा चलाने वाले उमर की शिकायत है कि घर-घर में सुरक्षा बलों के जवानों को तैनात कर दिया गया है। इससे हालात कैसे सुधरेंगे। सरकार करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। जब तक भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा, तब तक विकास संभव नहीं है। नेता अपनी जेब भरने में लगे हैं। कश्मीर के नेता दिल्ली में कुछ और बोलते हैं और कश्मीर में कुछ और। इसलिए हालात बिगड़ रहे हैं। 

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