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कश्मीरी पंडितों के दर्द पर लोकसभा में छलके आंसू

Tue, 12 Aug 2014 02:37 AM IST
Updated Tue, 12 Aug 2014 02:37 AM IST
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kashmiri pandits issue raised in loksabha

आम तौर पर बेवजह के हंगामे, महत्वहीन और बोझिल चर्चाओं में डूबे रहने वाले लोकसभा में सोमवार को कश्मीरी पंडितों की मार्मिक

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स्थिति पर दिल छू लेने वाली चर्चा हुई।

चर्चा की शुरुआत करने वाली टीआरएस की कविता कलवकुंतला के सवाल इतने तीखे थे कि अरसे से सदन में खामोश रहने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की भी चुप्पी टूट गई।

कविता ने कश्मीरी पंडितों की स्थिति का मार्मिक चित्रण करते हुए जब गृह मंत्री से पूछा कि एक आजाद और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में अपने ही नागरिक के विस्थापन के मुद्दे पर ऐसी संवदेनहीनता क्यों है तो पूरे सदन में चुप्पी छा गई।

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'पंडितों की कश्मीर घाटी में वापसी होगी'

kashmiri pandits issue raised in loksabha

यह चुप्पी अचानक तब टूटी, जब आडवाणी ने कश्मीरी पंडितों की स्थिति पर स्थायी समिति द्वारा तैयार रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखने की मांग की।

इसके बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को यह कहते हुए कश्मीरी पंडितों का दर्द बांटने का संदेश दिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, सरकार हर हाल में कश्मीरी पंडितों की कश्मीर घाटी में वापसी कराएगी।

इस दौरान राजनाथ ने न केवल लोकसभा से इस आशय का सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कराने की अपील की, बल्कि यह भी कहा कि नई सरकार के लिए कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास राजनीतिक नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय मुद्दा है।

'कौसर नाग यात्रा पर राजनीति न करें'

kashmiri pandits issue raised in loksabha

चर्चा की शुरुआत कविता ने मार्मिक और झकझोर देने वाले अंदाज में की।

उन्होंने कौसर नाग यात्रा मामले में राजनीति न करने की अपील की और कहा कि मुख्य सवाल यह है कि गाजा हिंसा सहित दुनिया भर के मामलों में चर्चा करने वाला यह सदन और दुनिया का सबसे बड़ा प्रजातंत्र 25 साल पहले 3.5 लाख लोगों को जबरन उजाड़ देने और इस दौरान 700 लोगों की हत्याओं पर क्यों चुप है?

उन्होंने यह भी पूछा कि इस दौरान दर्जनों कश्मीरी पंडितों की हत्या को सरेआम कबूल करने वाले आतंकी फारुख अहमद डार और एयरफोर्स के अधिकारी सहित कई जवानों की हत्या पर सरकार चुप क्यों है।

इस दौरान कविता ने यह भी जानना चाहा कि कश्मीर घाटी में इनके जाने पर सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?

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