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बच्चों के भविष्य की खातिर अब मुस्लिम परिवार भी छोड़ रहे हैं कश्मीर

Thu, 02 Mar 2017 12:37 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू Updated Thu, 02 Mar 2017 12:37 PM IST
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kashmiri muslims leaving valley for future of their children
कश्मीरी मुस्लिम कर रहे हैं पलायन - फोटो : डेमो फोटो

कश्मीर की हवा में मिली बारुदी गंध अब मुस्लिम परिवारों को भी रास नहीं आ रही है। कश्मीरी पंडितों के बाद अब अमन पसंद मुस्लिम परिवारों ने भी घाटी छोड़ना शुरू कर दिया है। हर महीने बंद और हड़ताल के कारण रोजमर्रा की जिंदगी अलगाववादियों और उपद्रवियों के हाथों बंधक बन गई है।

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स्कूल और कालेजों में अक्सर ताले लटक जाते हैं। नतीजतन बच्चों के करियर पर ग्रहण लग गया है। इतना ही नहीं, उपद्रवी तत्व बच्चों को पत्थरबाज बनने के लिए भी मजबूर करते हैं। मस्जिदों से बंद और हड़ताल में शामिल होने का फरमान जारी होता है और इसे नहीं मानने पर उपद्रवियों के हमले झेलने पड़ते हैं। अशांत माहौल ने कश्मीरियों को भी घाटी से इतर बसेरा ढूंढने पर विवश किया है।
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आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद लगभग 500 मुस्लिम परिवारों ने घाटी से दूर अपना आशियाना बना लिया है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री के आदेश से शुरू किए गए सर्वे के बाद अब तक कश्मीर घाटी छोड़ने वाले 110 मुस्लिम परिवारों का विस्थापितों के रूप में पंजीकरण किया गया है। 

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कश्मीरी छात्रों ने बाहर के राज्यों का किया रूख, सरकार गंभीर

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MEHBOOBA MUFTI - फोटो : file photo

इन विस्थापितों को भी कश्मीरी पंडितों की तरह सुविधाएं और मुआवजा देने का भी निर्णय लिया गया है। राहत एवं पुनर्वास मंत्री ए आर वीरी भी मानते हैं कि कुछ मुस्लिम परिवार विस्थापित हुए हैं। उन्हें बकायदा पंजीकृत कर मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। 

राजस्व, राहत एवं पुनर्वास विभाग के सूत्रों के अनुसार पिछले साल जुलाई से शुरू हुई कश्मीर हिंसा के बाद जम्मू, दिल्ली, मुबंई और देश के अन्य प्रमुख शहरों में लगभग 500 कश्मीरियों ने प्लाट और फ्लैट खरीदे हैं। इसके आकंड़े जुटाए जा रहे हैं। जम्मू में कश्मीरियों द्वारा अब भी प्लाट खरीदे जा रहे हैं।

हिंसा के कारण जब कश्मीर के स्कूल कालेज बंद हुए तो छह हजार से अधिक कश्मीरी बच्चों ने राजस्थान के कोटा, दिल्ली और जम्मू के कोचिंग संस्थानों में नामांकन कराया। ये बच्चे अब भी कश्मीर के बाहर संस्थानों में हैं और इनमें से अधिकांश ने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बाहर के शहरों में ही स्थायी रूप से रहना शुरू कर दिया है। 

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