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कश्मीर घाटी में हॉलैंड के तजुर्बे से खिलेंगे ट्यूलिप

Mon, 05 Dec 2016 08:04 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Mon, 05 Dec 2016 08:04 PM IST
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kAshmir will produce tulip with the techniques of Holland
Tulip - फोटो : File Photo
घाटी को फुलवारी के तौर पर विकसित कर पर्यटन विकास सुनिश्चित किया जाएगा। राज्य सरकार ने ट्यूलिप खेती के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हॉलैंड का तजुर्बा और तकनीकी विशेषता का लाभ उठाने के लिए हॉलैंड के विशेषज्ञ जॉन नील की सेवाएं अनुबंध पर ली हैं। इसी कड़ी में जॉन नील ने सोमवार को चश्मेशाही में स्थित एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन का दौरा किया। 
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फ्लोरीकल्चर विभाग के निदेशक मोहम्मद हुसैन सहित अन्य अफसरों के साथ ट्यूलिप गार्डन पहुंचे जॉन नील ने कहा, ट्यूलिप गार्डन आकर्षण का केंद्र है। इसके रखरखाव में और बेहतरी लाने के साथ ही ट्यूलिप खेती के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा। जॉन नील ने शुष्क मौसम में भी ट्यूलिप फूलों की क्यारियों के बेहतर रखरखाव के टिप्स दिए। उन्होंने कहा खर्च बचाने के लिए ट्यूलिप बल्ब के आयात से बचना होगा। घाटी में ही यदि ट्यूलिप के बल्ब तैयार किए जाएं तो इससे बड़े पैमाने पर खर्च बचाना मुमकिन हो सकेगा।
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फ्लोरीकल्चर के निदेशक मोहम्मद हुसैन ने बताया कि हॉलैंड को ट्यूलिप खेती के क्षेत्र में दुनिया भर में अलग पहचान हासिल है। हॉलैंड से ट्यूलिप बल्ब निर्यात किए जाते हैं। जम्मू-कश्मीर में भी हर साल हॉलैंड से ट्यूलिप बल्ब आयात किए जाते हैं। आयात शुल्क से बचने के लिए ही हॉलैंड के ट्यूलिप विशेषज्ञ की सेवाएं ली जा रही हैं। जॉन नील हर साल घाटी का दौरा करेंगे। भविष्य में विभाग किसानों को ट्यूलिप खेती के लिए प्रेरित करेगा।
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