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गिलानी समेत कश्मीर के कई अलगाववादी नेता नजरबंद, घाटी में लगातार तीसरे दिन तनाव का माहौल
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Sun, 12 Feb 2017 07:00 AM IST
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घाटी में तैनात जवान
- फोटो : फाइल फोटो
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जेकेेएलएफ संस्थापक मकबूल भट की बरसी पर शनिवार को घाटी बंद रही। दुकानें तथा व्यापारिक इदारे बंद रहे। सड़कों पर सार्वजनिक वाहन कम चले। रेल सेवा भी लगातार तीसरे दिन स्थगित रही। सरकारी दफ्तरों में उपस्थिति कम रही। भट के पैतृक गांव में प्रदर्शन कर अस्थियां लौटाने की मांग की गई।
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अलगाववादी नेताओं पर नकेल कसते हुए उन्हें नजरबंद रखा गया। शुक्रवार को गिरफ्तार जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक को सेंट्रल जेल भेज दिया गया। किसी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
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बंद को देखते हुए घाटी में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे। श्रीनगर के लाल चौक, मायसूमा के साथ-साथ पुराने शहर के कई इलाके सील किए गए थे। इसके अलावा हर जिले में संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी रखी गई थी, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।
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अलगाववादी नेता घरों में नजरबंद
अलगाववादी नेता मीरवाइज मौलवी उमर फारूक
- फोटो : file photo
अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज मौलवी उमर फारूक, शब्बीर शाह, अशरफ सहराई, नईम खान को घर पर नजरबंद रखा गया। मकबूल भट के पैतृक गांव कुपवाड़ा जिले के त्रेहगाम में काफी संख्या में लोगों ने रैली निकाल राष्ट्र विरोधी नारेबाजी की।
अलगाववादियों ने अफजल गुरु की बरसी पर नौ फरवरी और मकबूल भट की बरसी पर शनिवार को बंद का आह्वान किया था। दस फरवरी को यूएन चलो की कॉल दी थी। इसके चलते पिछले तीन दिन से घाटी में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मकबूल भट को 11 फरवरी 1984 को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी।
अलगाववादियों ने अफजल गुरु की बरसी पर नौ फरवरी और मकबूल भट की बरसी पर शनिवार को बंद का आह्वान किया था। दस फरवरी को यूएन चलो की कॉल दी थी। इसके चलते पिछले तीन दिन से घाटी में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मकबूल भट को 11 फरवरी 1984 को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी।