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आने वाले सालों में खत्म हो जाएगी कश्मीर में बर्फबारी

Wed, 21 Jan 2015 01:41 PM IST
Updated Wed, 21 Jan 2015 01:41 PM IST
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Kashmir is facing a serious crisis on the environment

मौसम के बदलते मिजाज कश्मीर के पर्यावरण पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। यही हाल रहा तो आने वाले सालों में यहां के खूबसूरत ग्लेशियर, झरने, झीलें और दरिया तेजी से लुप्त होने लगेंगे और अंतत: अस्तित्व खो देंगे।

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कश्मीर विश्वविद्यालय में हुए एक शोध ने इस खतरे से आगाह किया है। बदलाव का असर अब से ही देखने को मिल रहा है। इस बार न के बराबर हुई बर्फबारी के कारण कश्मीर के कारोबारी ही नहीं सैलानी भी निराश हैं। पर्यटकों की तादाद में काफी कमी हुई है। इसका सीधा असर यहां की अर्थ व्यवस्था पर पड़ा है।
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यहां के सुहावने मौसम, दिलकश नजारों, ग्लेशियरों और नदी-नालों के कारण कश्मीर को धरती का जन्नत कहा जाता है। कश्मीर विश्वविद्यालय के भू विज्ञान विभाग के विशेषज्ञों द्वारा किया गया शोध इस बदलाव को घाटी के पर्यावरण के लिए हानिकारक मानता है।
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तेजी से प‌िघल रहे हैं ग्लेश‌ियर

Kashmir is facing a serious crisis on the environment

विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शकील रामशू के अनुसार रिसर्च से यह बात सामने आई है कि इसी तेजी से बदलाव जारी रहा तो सदी के अंत तक कश्मीर जन्नत का दर्जा खो सकता है। रिसर्च के अनुसार, इस सदी में तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है, जिससे ग्लेशियरों का पिघलना तेज हो रहा है।

रिसर्च यह भी कहती है कि सदी के अंत तक कश्मीर में बर्फबारी में 50 प्रतिशत तक की कमी होगी। रामशू के अनुसार, इस समय पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ देखने को मिलती थी, लेकिन इस वर्ष अब तक यहां खामोशी छाई हुई है। पर्यटन विभाग ने भी अपने शीतकालीन कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया।

बदलाव का असर कश्मीर के विंटर टूरिज्म पर भी दिखना शुरू हो गया है। तापमान में बढ़ोतरी ने गुलमर्ग और पहलगाम की पहाड़ियों पर बर्फ की मात्रा में बहुत कमी लाई है।

शोधकर्ताओं के अनुसार वातावरण में बदलाव का सबसे ज्यादा असर पहाड़ों पर देखने को मिलता है। तापमान में बढ़ोतरी से पहाड़ों पर हुई कम बर्फबारी और घटते ग्लेशियर पर पड़ रहा है। यह चिंताजनक है।

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