{"_id":"6a121a4492ab348fb30a8c47","slug":"ju-part-time-work-jammu-news-c-10-jmu1050-920418-2026-05-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: पढ़ाई के साथ कमाई भी, अर्न व्हाइल यू लर्न योजना के तहत जम्मू विवि में छात्रों को मिलेगा पार्ट टाइम वर्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: पढ़ाई के साथ कमाई भी, अर्न व्हाइल यू लर्न योजना के तहत जम्मू विवि में छात्रों को मिलेगा पार्ट टाइम वर्क
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। फीस, किताबों, हॉस्टल और जेब खर्च की चिंता के बीच जम्मू विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए राहत की खबर है। अब छात्रों को पढ़ाई के साथ कमाई के लिए बाहर काम नहीं ढूंढना पड़ेगा। विश्वविद्यालय अर्न व्हाइल यू लर्न (पढ़ाई के साथ कमाई) योजना शुरू करने जा रहा है। इसके तहत छात्र कैंपस में ही पार्ट टाइम काम कर सकेंगे और हर महीने 6,400 रुपये तक कमा पाएंगे।
छात्रों को प्रति घंटे 200 रुपये दिए जाएंगे। पढ़ाई पर असर न पड़े, सप्ताह में अधिकतम आठ घंटे काम लिया जाएगा। भुगतान सीधे बैंक खातों में होगा। योजना का लाभ यूजी, पीजी और पीएचडी के छात्र उठा सकेंगे। योजना में जरूरतमंद छात्रों पर विशेष ध्यान दिया है। आवेदन करने वाले छात्रों के कम से कम 45 प्रतिशत अंक होना जरूरी होगा। जो छात्र पहले से स्कॉलरशिप, फेलोशिप या स्टाइपेंड का लाभ ले रहे हैं वे फायदा नहीं ले सकेंगे। अकादमिक मामलों के डीन प्रोफेसर जेपी सिंह जूरेल का कहना है कि इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ काम सीखने और जिम्मेदारी समझने का मौका मिलेगा।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
विज्ञापन
मेरिट और स्किल के आधार पर मौका
छात्रों का चयन तय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। अलग-अलग विभाग जरूरत के हिसाब से छात्रों की मांग भेजेंगे। विभागीय समिति मेरिट और स्किल के आधार पर चयन करेगी। कंप्यूटर की जानकारी और दूसरी गतिविधियों में भागीदारी को भी महत्व दिया जा सकता है। विभागाध्यक्ष और जिम्मेदार अधिकारी छात्रों के काम की निगरानी करेंगे और उसका रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। विवि का मानना है कि योजना छात्रों को अपने पैरों पर खड़ा होने और भविष्य की नौकरी के लिए तैयार होने में मदद करेगी।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
इन कार्यों को कर सकेंगे
- लाइब्रेरी और लैब में मदद
- डेटा एंट्री और रिकॉर्ड संभालना
- दफ्तरों के काम में सहयोग
- कार्यक्रम के आयोजन में मदद
- हॉस्टल और गेस्ट हाउस की देखरेख
- प्रेजेंटेशन और प्रैक्टिकल में सहायता
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
जेब खर्च निकलेगा, अनुभव भी मिलेगा
हर्षिता ने कहा कि पहल से छात्र पढ़ाई के साथ जेब खर्च निकाल सकेंगे और साथ ही काम का अनुभव भी हासिल करेंगे। तरुण ने कहा कि कई छात्रों को स्कॉलरशिप नहीं मिलती, ऐसे में योजना बड़ी राहत साबित हो सकती है। सनक श्रीवत्स ने विश्वविद्यालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह योजना छात्रों को आत्मनिर्भर बनने, काम सीखने और व्यावहारिक अनुभव हासिल करने में मदद करेगी।
विज्ञापन
छात्रों को प्रति घंटे 200 रुपये दिए जाएंगे। पढ़ाई पर असर न पड़े, सप्ताह में अधिकतम आठ घंटे काम लिया जाएगा। भुगतान सीधे बैंक खातों में होगा। योजना का लाभ यूजी, पीजी और पीएचडी के छात्र उठा सकेंगे। योजना में जरूरतमंद छात्रों पर विशेष ध्यान दिया है। आवेदन करने वाले छात्रों के कम से कम 45 प्रतिशत अंक होना जरूरी होगा। जो छात्र पहले से स्कॉलरशिप, फेलोशिप या स्टाइपेंड का लाभ ले रहे हैं वे फायदा नहीं ले सकेंगे। अकादमिक मामलों के डीन प्रोफेसर जेपी सिंह जूरेल का कहना है कि इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ काम सीखने और जिम्मेदारी समझने का मौका मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
मेरिट और स्किल के आधार पर मौका
छात्रों का चयन तय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। अलग-अलग विभाग जरूरत के हिसाब से छात्रों की मांग भेजेंगे। विभागीय समिति मेरिट और स्किल के आधार पर चयन करेगी। कंप्यूटर की जानकारी और दूसरी गतिविधियों में भागीदारी को भी महत्व दिया जा सकता है। विभागाध्यक्ष और जिम्मेदार अधिकारी छात्रों के काम की निगरानी करेंगे और उसका रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। विवि का मानना है कि योजना छात्रों को अपने पैरों पर खड़ा होने और भविष्य की नौकरी के लिए तैयार होने में मदद करेगी।
इन कार्यों को कर सकेंगे
- लाइब्रेरी और लैब में मदद
- डेटा एंट्री और रिकॉर्ड संभालना
- दफ्तरों के काम में सहयोग
- कार्यक्रम के आयोजन में मदद
- हॉस्टल और गेस्ट हाउस की देखरेख
- प्रेजेंटेशन और प्रैक्टिकल में सहायता
जेब खर्च निकलेगा, अनुभव भी मिलेगा
हर्षिता ने कहा कि पहल से छात्र पढ़ाई के साथ जेब खर्च निकाल सकेंगे और साथ ही काम का अनुभव भी हासिल करेंगे। तरुण ने कहा कि कई छात्रों को स्कॉलरशिप नहीं मिलती, ऐसे में योजना बड़ी राहत साबित हो सकती है। सनक श्रीवत्स ने विश्वविद्यालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह योजना छात्रों को आत्मनिर्भर बनने, काम सीखने और व्यावहारिक अनुभव हासिल करने में मदद करेगी।