कश्मीरी पंडित एक स्वर में बताएं कैसे बसाएं : जितेंद्र
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कश्मीर में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए कालोनी, होमलैंड या क्लस्टर बनाने पर मोदी सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। सवाल है कि कश्मीरी पंडितों को क्या चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी तैयार है। गृह मंत्री राजनाथ तैयार हैं, लेकिन कश्मीरी पंडित तैयार नहीं हैं।
उन्हें एक स्वर में अपनी बात करनी होगी और वह यकीन दिलाते हैं कि जोे भी मांग एक स्वर में कश्मीरी पंडित करेंगे, वह उस मांग को प्रधानमंत्री और राजनाथ सिंह के संज्ञान में लाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू कश्मीर को बड़े बेहतर तरीके से जानते है। कश्मीरी पंडितों की जितनी चिंता प्रधानमंत्री मोदी कर सकते हैं, उतनी इससे पहले न कभी र्हुई होगी और न होगी।
पीएमओ में केंद्रीय राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने रविवार को जम्मू में कश्मीरी पंडितों की ओर से आयोजित सेमिनार में यह बात कही। सिंह ने कहा कि अब तक यह होता आया है कि जिस कश्मीरी पंडित प्रतिनिधिमंडल को वह नई दिल्ली में प्रधानमंत्री या गृह मंत्री से मिलाते हैं, उसका दूसरा संगठन विरोध कर देता है। इससे बात नहीं बनेगी। एक स्वर में बात करनी होगी।
'पंडित दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा पर भाजपा कायम'
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी कश्मीर में कालोनी की बात का समर्थन किया, लेकिन कश्मीरी पंडित पूरी तरह तैयार नजर नहीं आए। उन्होंने कहा कि रियासत में जो लोग पीओके या पश्चिमी पाक रिफ्यूजियों को नागरिकता और उन्हें पहचान पत्र देने पर कड़ा एतराज जताते हैं, वे यहां बसे विदेशी मूल के नागरिकों पर चुप्पी साधे बैठे हैं और वे इन्हें बसने दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा पर भाजपा कायम है। देश भर में अनेकों पदों पर साक्षात्कार को राज्य सरकारों ने खत्म कर दिया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में इस खत्म करने के बजाय साक्षात्कार के और अंक बढ़ाए जाने की उन्हें सूचना है। इस पर राज्य सरकार को चिंता करनी होगी।
इस अवसर पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सत शर्मा ने कहा कि कश्मीरी पंडित विस्थापित राष्ट्रवाद से जुड़े हैं और पार्टी इनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और इन्हें विश्वास में लेकर ही इनका पुनर्वास किया जाएगा। इस अवसर पर विभिन्न कश्मीरी पंडित विस्थापितों के संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, इनमें अश्विनी चुरंगू, अजय चुरंगू, पंडित आरके भट्ट, विरेंद्र रैणा, संजय कौल शामिल रहे। सेमिनार के दौरान हृदयनाथ जत्तू को पंडित वैष्णवी अवार्ड से सम्मानित किया गया।