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Jammu News: राष्ट्रीय कश्मीरी हिंदू अधिवेशन 13 जुलाई को
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यूथ फाॅर पनुन कश्मीर की ओर से होगा आयोजन, जुटेंगे देशभर से राष्ट्रवादी हिंदू नेता
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। यूथ फॉर पनुन कश्मीर की ओर से 13 जुलाई को राष्ट्रीय कश्मीरी हिंदू अधिवेशन का आयोजन होगा। इसमें देशभर से राष्ट्रवादी हिंदू नेता, प्रभावशाली व्यक्ति जुटेंगे। अधिवेशन का उद्देश्य 13 जुलाई के ऐतिहासिक सत्य को बताना और वास्तविक पीड़ितों को सम्मानित करने के साथ-साथ कश्मीरी हिंदू प्रतिरोध को देशव्यापी हिंदू चेतना से जोड़ा है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा मे 13 जुलाई 1931 के शहीद- गद्दार के वाद-विवाद के बीच यह अधिवेशन हो रहा है। सोमवार को यूथ फाॅर पनुन कश्मीर के शीर्ष बोर्ड और कार्यकारी निकाय की बैठक हुई। इसमें बताया कि इस अधिवेशन देश के प्रमुख राष्ट्रवादी और हिंदू नेता, प्रभावशाली व्यक्ति शामिल होंगे। चलो-जगती, अधिकार रैली के बाद अब कश्मीरी हिंदू संघर्ष पर देशव्यापी ध्यान फिर से जगाया जाएगा। यूथ फाॅर पनुन कश्मीर सचिव राजेश काचरू ने इसकी घोषणा की। अध्यक्ष राहुल कौल ने कहा कि अधिवेशन एक सामुदायिक सभा नहीं है, बल्कि एक सभ्यता की घोषणा है।
पनुन कश्मीर की स्थापना हिंदू राष्ट्र की स्थापना की दिशा में पहला कदम हो सकता है। संस्कृत सभ्यता को उसके जन्मस्थान कश्मीर में फिर से स्थापित करना वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य है। यूथ फाॅर पनुन कश्मीर के अध्यक्ष विट्ठल चौधरी ने कहा 13 जुलाई का दिन बहुत प्रतीकात्मक है जो 1931 के दुखद बट्टा लूट दिवस को दर्शाता है।
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इस दिन कश्मीरी पंडितों पर हिंसक हमले व लूटपाट की गई। दशकों से लगातार राज्य सरकारें इसे शहीद दिवस के रूप में मनाती रही हैं, और अपराधियों का महिमामंडन करती रही हैं। इस अधिवेशन का उद्देश्य ऐतिहासिक सत्य को पुनः प्राप्त करना और वास्तविक पीड़ितों को सम्मानित करना है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। यूथ फॉर पनुन कश्मीर की ओर से 13 जुलाई को राष्ट्रीय कश्मीरी हिंदू अधिवेशन का आयोजन होगा। इसमें देशभर से राष्ट्रवादी हिंदू नेता, प्रभावशाली व्यक्ति जुटेंगे। अधिवेशन का उद्देश्य 13 जुलाई के ऐतिहासिक सत्य को बताना और वास्तविक पीड़ितों को सम्मानित करने के साथ-साथ कश्मीरी हिंदू प्रतिरोध को देशव्यापी हिंदू चेतना से जोड़ा है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा मे 13 जुलाई 1931 के शहीद- गद्दार के वाद-विवाद के बीच यह अधिवेशन हो रहा है। सोमवार को यूथ फाॅर पनुन कश्मीर के शीर्ष बोर्ड और कार्यकारी निकाय की बैठक हुई। इसमें बताया कि इस अधिवेशन देश के प्रमुख राष्ट्रवादी और हिंदू नेता, प्रभावशाली व्यक्ति शामिल होंगे। चलो-जगती, अधिकार रैली के बाद अब कश्मीरी हिंदू संघर्ष पर देशव्यापी ध्यान फिर से जगाया जाएगा। यूथ फाॅर पनुन कश्मीर सचिव राजेश काचरू ने इसकी घोषणा की। अध्यक्ष राहुल कौल ने कहा कि अधिवेशन एक सामुदायिक सभा नहीं है, बल्कि एक सभ्यता की घोषणा है।
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पनुन कश्मीर की स्थापना हिंदू राष्ट्र की स्थापना की दिशा में पहला कदम हो सकता है। संस्कृत सभ्यता को उसके जन्मस्थान कश्मीर में फिर से स्थापित करना वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य है। यूथ फाॅर पनुन कश्मीर के अध्यक्ष विट्ठल चौधरी ने कहा 13 जुलाई का दिन बहुत प्रतीकात्मक है जो 1931 के दुखद बट्टा लूट दिवस को दर्शाता है।
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इस दिन कश्मीरी पंडितों पर हिंसक हमले व लूटपाट की गई। दशकों से लगातार राज्य सरकारें इसे शहीद दिवस के रूप में मनाती रही हैं, और अपराधियों का महिमामंडन करती रही हैं। इस अधिवेशन का उद्देश्य ऐतिहासिक सत्य को पुनः प्राप्त करना और वास्तविक पीड़ितों को सम्मानित करना है।