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जम्मू विश्वविद्यालय: अमृत काल व्याख्यान श्रृंखला के तहत दो दिवसीय कार्यक्रम का आगाज

Mon, 06 May 2024 03:04 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Mon, 06 May 2024 03:04 PM IST
सार

प्रोफेसर दिनेश सिंह ने सिंधु घाटी सभ्यता से श्रीनिवास रामानुजन तक: भारतीय गणित का आकर्षक इतिहास विषय पर अपनी बात रखी। इस दौरान उपराज्यपाल के सलाहकार ने इस तरह के व्याख्यान के आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। 
 

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Jammu University : Two-day program under Amrit Kaal Lecture Series begins
जम्मू विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू विश्वविद्यालय में अमृत काल व्याख्यान श्रृंखला के तहत दो दिवसीय कार्यक्रम का आगाज सोमवार को हुआ। शिक्षा का विकास करना, सीमाओं को खत्म करना विषय पर आयोजित व्याख्यान में उपराज्यपाल के सलाहकार राजीव राय भटनागर मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। छह और सात मई तक चलने वाला व्याख्यान जम्मू यूनिवर्सिटी के ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह ऑडिटोरियम में हो रहा है। 

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इस व्याख्यान के पहले दिन जम्मू कश्मीर उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष पदम् श्री प्रोफेसर दिनेश सिंह ने सिंधु घाटी सभ्यता से श्रीनिवास रामानुजन तक: भारतीय गणित का आकर्षक इतिहास विषय पर अपनी बात रखी। इस दौरान उपराज्यपाल के सलाहकार ने इस तरह के व्याख्यान के आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। 
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प्रोफेसर दिनेश सिंह को भारतीय प्रज्ञा भूषण सम्मान से सम्मानित किया। अपने विषय पर बात करते हुए दिनेश सिंह ने कहा कि ये यज्ञ वेद के साथ गणित जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पाइथागोरस का इस्तेमाल सालों से भारत में होता रहा है। पाइथागोरस खुद भारत में आए हैं। इसके कई परिणाम है। वह जैन धर्म से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने मांस खाना छोड़ दिया। 
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हर कॉन्ट्रेक्शन साइट पर आज भी सुलभ सुतरा का उपयोग होता है। उन्होंने कहा कि हमारे पास आर्य भट्ट को लेकर कम जानकारी है। हजारों साल पहले कि उन्होंने कहा है कि पृथ्वी सूर्य के इर्द-गिर्द घूमती है। जब उन्होंने आर्यभटीय की रचना की, तब उनकी आयु 21 वर्ष थी। इस महान कृति में उन्होंने गणित और खगोल विज्ञान में कई महत्वपूर्ण खोजों का उल्लेख किया है।

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