राजनीति का अखाड़ा बना जम्मू विश्वविद्यालय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जैसा कि सोचा जा रहा था, ठीक वैसा ही हो रहा है। जम्मू विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के लिए खूब राजनीति हो रही है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने मंगलवार को जम्मू विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में सीधे अपने प्रत्याशी उतारने से इंकार कर दिया। लेकिन यह भी साफ किया है कि समान सोच वाले प्रत्याशियों को समर्थन जारी रहेगा। यह उसने तब किया है, जबकि प्रतिद्वंद्वी छात्र संगठन भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) सहयोगी संगठनों के साथ पैनल बनाकर प्रत्याशी उतार रहा है। उसने हर्षवर्धन सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
इस संबंध में बीते शुक्रवार को ही एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष नीरज कुंदन ने एनसीएसयू के साहिल सिंह जंवाल, गुज्जर बक्करवाल स्टूडेंट्स एसोसिएशन, पहाड़ी स्टूडेंट्स इवाल्यूशन आदि के साथ मिलकर पैनल बना प्रत्याशी उतारने पर मुहर लगा दी थी। यह भी साफ किया था कि उनका साथ आने का मकसद एबीवीपी जैसे संगठन को कैंपस से दूर रखना है। परिषद ने इसी का जवाब सीधे प्रत्याशी न उतारकर दिया है।
सीआर/डीआर (एक्जीक्यूटिव कौंसिल) के चुनाव में एबीवीपी के हाथ सबसे अधिक 30+ सीटें आने का दावा किया गया था। वहीं, एनएसयूआई ने 24+, एनसीएसयू और अन्य ने 14+ सीटों का दावा किया था। इसे देखते हुए यह सभी संगठन एक साथ आकर खुद को सर्वोपरि साबित करना चाहते हैं।बेशक यह ओपन चुनाव नहीं, लेकिन अभी तक की स्थितियों से एनएसयूआई-एबीवीपी में साफ टक्कर दिखती है। बाकी स्थिति बुधवार को नाम वापसी के साथ साफ होगी।