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जम्मू: एक ही परिवार के तीन सदस्यों की हत्या में आतंकी को दोहरी उम्रकैद, दोषी पर दो लाख का जुर्माना भी लगाया
Thu, 22 Oct 2026 12:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 22 Oct 2026 12:11 AM IST
सार
सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और जेल में बिताई गई अवधि को कुल सजा की अवधि से घटा दिया जाएगा।
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- फोटो : एआई
विस्तार
रामबन जिले के गूल में करीब 21 वर्ष पहले के आतंकी हमले में अदालत ने मोहम्मद आरिफ को दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई है। उसे दो लाख रुपये जुर्माना भी भरना होगा। स्थानीय निवासी के बेटे के सेना में होने संबंधी सवाल पूछकर परिवार पर गोलियां बरसा दी थीं। हमले में छह महीने के बच्चे समेत परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई थी।
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मोहम्मद शरीफ को हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य अपराधों का दोषी ठहराया गया। प्रधान सत्र न्यायाधीश अजय कुमार गुप्ता की अदालत ने बुधवार को रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) की धारा 302, धारा 121-ए, धारा 307 और भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा 7/27 के तहत दोहरी उम्र कैद की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और जेल में बिताई गई अवधि को कुल सजा की अवधि से घटा दिया जाएगा।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार 27 जुलाई, 2005 की शाम शब्बीर अहमद और मो. शरीफ नाम के दो हथियारबंद आतंकी गूल के सोखर में अब्दुल रशीद बोहरा के घर पहुंचे। उन्होंने परिवार से पूछा कि क्या रशीद का बेटा तनवीर अहमद सेना से जुड़ा हुआ है? हां...सुनते ही आतंकियों ने एके-47 से परिवार पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इससे ताजा बेगम, उनकी बेटी शाहीन बानो और छह महीने के मुंतजर अहमद की मौत हो गई। अब्दुल रशीद और उनकी बहू मशूमा बेगम गंभीर जख्मी हो गए। पुलिस स्टेशन गूल में मामला दर्ज किया गया।
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दुलर्भतम से दुर्लभ की श्रेणी में नहीं आता मामला, इसलिए मौत की सजा नहीं
बचाव पक्ष के वकील ने घटना के दो दशक पुरानी होने, दोषी के युवा होने, उसकी पारिवारिक जिम्मेदारियों, पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होने, जेल में अच्छे व्यवहार और सुधरने की संभावना का हवाला देते हुए नरमी की अपील की। अदालत ने माना कि अपराध अत्यंत गंभीर था, लेकिन यह दुर्लभतम से दुर्लभ (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) श्रेणी में नहीं आता। लिहाजा, मौत की सजा नहीं दी जाएगी।
सह-आरोपी की मौत के बाद खत्म की गई कार्रवाई
हमले में सह-आरोपी शब्बीर अहमद की मौत के बाद उसके खिलाफ चल रही कार्रवाई फरवरी, 2022 में समाप्त कर दी गई। अभियोजन पक्ष ने उसका मृत्यु प्रमाण पत्र पेश किया था, जिसमें 21 जुलाई, 2006 को उसकी मौत की जानकारी दी गई थी।
यह होती है दोहरी उम्रकैद
जब अदालत किसी दोषी को एक से अधिक अलग-अलग गंभीर मामलों (जैसे दोहरा हत्याकांड) में अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाती है, तो उसे दोहरी उम्रकैद कहा जाता है। ये सजा एक के बाद एक नहीं, बल्कि एक साथ चलती है।