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Jammu News: रात के बाद शांति से बीता दिन...पर आशंकाओं से घिरे रहे लोग
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संघर्ष विराम के बाद का पहला दिन: दुकानें खुलीं, पर खरीदार न के बराबर
घर से लेकर बाजार तक चर्चाओं में में पाकिस्तान की करतूतों पर बात
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। संघर्ष विराम के बाद का पहला दिन रविवार को आम दिनों की तुलना में बहुत शांत था। तीन दिन से लगातार ड्रोन हमले और गोलाबारी की धमक के साथ बीत रही रातें शनिवार को आधी रात के बाद से शांत थीं। यह सिलसिला बरकरार रहा और सुबह भी शांत थी। पर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र की चर्चा और उसके कारण चिंता, लोगों की बातचीत में साफ-साफ दिखाई दे रही थी।
रविवार की सुबह राहत से भरी थी। उनींदी आंखें नहीं थीं। हालांकि उठने के साथ ही अखबार से लेकर खबर देने वाले अन्य साधनों पर लोगों की नजरें बराबर टिकी थीं कि कहीं कोई हमला तो नहीं हुआ। कान बराबर उन आवाजों पर लगे थे, जो सात मई से लगातार परेशान कर रही थीं, डराने की कोशिश कर रही थीं।
बाजार सुबह 10 बजे तक खुल चुके थे, जैसे आम दिनों में खुलते हैं। अंतर सिर्फ इतना था कि खरीदार गिने-चुने ही नजर आ रहे थे। कारोबारियों का कहना था कि हमले की आशंकाओं से लोग ज्यादा बाहर निकलने से बच भी रहे हैं। बीते तीन-चार दिन में जो कुछ लोगों ने देखा और सुना, उसने एक अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। आपरेशन सिंदूर से सीज फायर के बीच जिस तरह से घटनाक्रम बदला है, उसमें लोगों को पाकिस्तान के चरित्र पर यकीन नहीं। यही वजह है कि लोग जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। इसी तरह सड़कों पर वाहन तो दिखे, पर संख्या बेहद कम रही। मेटाडोर भी कम चली। हालांकि रविवार को संख्या कम होती है, पर यह आम दिनों से भी बहुत कम नजर आई। मेटाडोर चालक बलविंदर के मुताबिक, शुक्रवार को दिन में जिस तरह से हमले हुए हैं, उससे लोगों में डर तो है ही। धीरे-धीरे लोग बाहर निकलेंगे।
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एहतियातन शहरवासियों ने किया स्वैच्छिक ब्लैकआउट
जम्मू। शनिवार को संघर्ष विराम की घोषणा के बाद पाकिस्तान ने फिर भारी गोलाबारी की थी। इसके बाद शहर के लोग सुरक्षा के प्रति चिंतित हैं और खुद ही गंभीरता बरत रहे हैं। रविवार को शाम होते ही शहर में अधिकांश क्षेत्रों में लोगों ने स्वैच्छिक ब्लैकआउट कर घरों की लाइट बंद रखीं।
गौरतलब रहे कि तीन दिनों में जम्मू शहर में पाकिस्तान ने कई बार ड्रोन से हमले किए हैं। रविवार शाम को बाजारों में सन्नाटा रहा। वहीं, लोगों ने खुद ही ब्लैकआउट का समर्थन करते हुए लाइटें बंद कर दीं।
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घर से लेकर बाजार तक चर्चाओं में में पाकिस्तान की करतूतों पर बात
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। संघर्ष विराम के बाद का पहला दिन रविवार को आम दिनों की तुलना में बहुत शांत था। तीन दिन से लगातार ड्रोन हमले और गोलाबारी की धमक के साथ बीत रही रातें शनिवार को आधी रात के बाद से शांत थीं। यह सिलसिला बरकरार रहा और सुबह भी शांत थी। पर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र की चर्चा और उसके कारण चिंता, लोगों की बातचीत में साफ-साफ दिखाई दे रही थी।
रविवार की सुबह राहत से भरी थी। उनींदी आंखें नहीं थीं। हालांकि उठने के साथ ही अखबार से लेकर खबर देने वाले अन्य साधनों पर लोगों की नजरें बराबर टिकी थीं कि कहीं कोई हमला तो नहीं हुआ। कान बराबर उन आवाजों पर लगे थे, जो सात मई से लगातार परेशान कर रही थीं, डराने की कोशिश कर रही थीं।
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बाजार सुबह 10 बजे तक खुल चुके थे, जैसे आम दिनों में खुलते हैं। अंतर सिर्फ इतना था कि खरीदार गिने-चुने ही नजर आ रहे थे। कारोबारियों का कहना था कि हमले की आशंकाओं से लोग ज्यादा बाहर निकलने से बच भी रहे हैं। बीते तीन-चार दिन में जो कुछ लोगों ने देखा और सुना, उसने एक अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। आपरेशन सिंदूर से सीज फायर के बीच जिस तरह से घटनाक्रम बदला है, उसमें लोगों को पाकिस्तान के चरित्र पर यकीन नहीं। यही वजह है कि लोग जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। इसी तरह सड़कों पर वाहन तो दिखे, पर संख्या बेहद कम रही। मेटाडोर भी कम चली। हालांकि रविवार को संख्या कम होती है, पर यह आम दिनों से भी बहुत कम नजर आई। मेटाडोर चालक बलविंदर के मुताबिक, शुक्रवार को दिन में जिस तरह से हमले हुए हैं, उससे लोगों में डर तो है ही। धीरे-धीरे लोग बाहर निकलेंगे।
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एहतियातन शहरवासियों ने किया स्वैच्छिक ब्लैकआउट
जम्मू। शनिवार को संघर्ष विराम की घोषणा के बाद पाकिस्तान ने फिर भारी गोलाबारी की थी। इसके बाद शहर के लोग सुरक्षा के प्रति चिंतित हैं और खुद ही गंभीरता बरत रहे हैं। रविवार को शाम होते ही शहर में अधिकांश क्षेत्रों में लोगों ने स्वैच्छिक ब्लैकआउट कर घरों की लाइट बंद रखीं।
गौरतलब रहे कि तीन दिनों में जम्मू शहर में पाकिस्तान ने कई बार ड्रोन से हमले किए हैं। रविवार शाम को बाजारों में सन्नाटा रहा। वहीं, लोगों ने खुद ही ब्लैकआउट का समर्थन करते हुए लाइटें बंद कर दीं।