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Jammu News: नतीजों के बाद बच्चों का तनाव कम करने में अभिभावकों की भूमिका अहम
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मनोचिकित्सक डा. जगदीश थापा
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करियर की सोच, अपेक्षा से कम अंक और असफलता से बिगड़ता है मानसिक संतुलन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। किसी भी परीक्षा और उसके नतीजों को लेकर तनाव होना लाजमी है। वर्तमान में जेके स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षाओं में लाखों बच्चे सफल हुए, लेकिन हजारों असफल भी हुए हैं। सफल छात्रों में कई ऐसे भी हैं, जिनके अपनी या अभिभावकों की अपेक्षा से कम अंक आए। इन सारी परिस्थितियों में हजारों किशोरों में विभिन्न तरह के तनाव की समस्या हो सकती है।
मनोचिकित्सकों के अनुसार ऐसे समय में छात्रों के तनाव को कम करने के लिए अभिभावकों की भूमिका अहम रहती है। खासतौर पर असफल छात्रों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। इसमें कई छात्र आत्महत्या के लिए प्रेरित हो जाते हैं।
साइकाइटरी अस्पताल जम्मू के पूर्व एचओडी व वरिष्ठ मनोचिकित्सक डाॅ. जगदीश थापा ने कहा कि बच्चों से उनकी क्षमता के विपरीत अधिक अपेक्षाएं करना घातक हो रहा है। हर अभिभावक अपने बच्चों को डाक्टर और इंजीनियर आदि के रूप में देखना चाहता है। लेकिन, उनकी क्षमताओं के मुताबिक कई में यह संभव नहीं हो पाता है।
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परीक्षाओं में जो बच्चे सफल होते हैं, उनके सामने अपने करियर को लेकर तनाव रहता है। इसी तरह जिनके कम अंक आए हैं उनके सामने अच्छे स्कूल या कॉलेज में दाखिला लेने का तनाव रहता है। कई ऐसे होते हैं जिन्हें अधिक अंक आने का पूरा यकीन था, लेकिन आने पर दोबारा परीक्षा देने की सोच का तनाव रहता है।
पिछले कुछ सालों में परीक्षा नतीजों के बाद असफल छात्रों में आत्महत्या का रास्ता चुनने की प्रवृति बढ़ी है। इन मामलों में काफी हद तक अभिभावकों की डांट-डपट, उनकी दूसरों से तुलना करना, सामाजिक समर्थन न मिलना आदि जिम्मेदार रहता है। इस बार 12वीं कक्षा में 103308 परीक्षार्थियों में 75 फीसदी से 77311 और दसवीं की परीक्षा में 145671 परीक्षार्थियों में से 116453 सफल हुए हैं, यानी हजारों असफल भी हुए हैं।
अगले सप्ताह तक सीबीएसई 10वीं और 12वीं कक्षा के भी परीक्षा परिणाम आने वाले हैं।
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नतीजों के बाद छात्रों के लिए यह है जरूरी
-अभिभावक असफल छात्रों की दूसरों से तुलना न करें
-अभिभावक अधिकांश समय बच्चों के साथ रहें और उन्हें अकेला न छोड़ें
-बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें
-स्कूल शिक्षकों द्वारा छात्रों का बेहतर मार्गदर्शन करें
-बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए काउंसिलिंग जरूरी
-नतीजों के बाद बच्चों को शांत रहने के लिए प्रोत्साहित करें, सकारात्मक सोच बढ़ाएं
-बच्चों को शारीरिक व्यायाम से जोड़ें, अच्छी नींद के लिए समय दें
-परिवार और दोस्तों से बात करें
-यदि आप तनाव से निपटने में संघर्ष कर रहे हैं, तो मदद मांगने में संकोच न करें
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। किसी भी परीक्षा और उसके नतीजों को लेकर तनाव होना लाजमी है। वर्तमान में जेके स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षाओं में लाखों बच्चे सफल हुए, लेकिन हजारों असफल भी हुए हैं। सफल छात्रों में कई ऐसे भी हैं, जिनके अपनी या अभिभावकों की अपेक्षा से कम अंक आए। इन सारी परिस्थितियों में हजारों किशोरों में विभिन्न तरह के तनाव की समस्या हो सकती है।
मनोचिकित्सकों के अनुसार ऐसे समय में छात्रों के तनाव को कम करने के लिए अभिभावकों की भूमिका अहम रहती है। खासतौर पर असफल छात्रों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। इसमें कई छात्र आत्महत्या के लिए प्रेरित हो जाते हैं।
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साइकाइटरी अस्पताल जम्मू के पूर्व एचओडी व वरिष्ठ मनोचिकित्सक डाॅ. जगदीश थापा ने कहा कि बच्चों से उनकी क्षमता के विपरीत अधिक अपेक्षाएं करना घातक हो रहा है। हर अभिभावक अपने बच्चों को डाक्टर और इंजीनियर आदि के रूप में देखना चाहता है। लेकिन, उनकी क्षमताओं के मुताबिक कई में यह संभव नहीं हो पाता है।
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परीक्षाओं में जो बच्चे सफल होते हैं, उनके सामने अपने करियर को लेकर तनाव रहता है। इसी तरह जिनके कम अंक आए हैं उनके सामने अच्छे स्कूल या कॉलेज में दाखिला लेने का तनाव रहता है। कई ऐसे होते हैं जिन्हें अधिक अंक आने का पूरा यकीन था, लेकिन आने पर दोबारा परीक्षा देने की सोच का तनाव रहता है।
पिछले कुछ सालों में परीक्षा नतीजों के बाद असफल छात्रों में आत्महत्या का रास्ता चुनने की प्रवृति बढ़ी है। इन मामलों में काफी हद तक अभिभावकों की डांट-डपट, उनकी दूसरों से तुलना करना, सामाजिक समर्थन न मिलना आदि जिम्मेदार रहता है। इस बार 12वीं कक्षा में 103308 परीक्षार्थियों में 75 फीसदी से 77311 और दसवीं की परीक्षा में 145671 परीक्षार्थियों में से 116453 सफल हुए हैं, यानी हजारों असफल भी हुए हैं।
अगले सप्ताह तक सीबीएसई 10वीं और 12वीं कक्षा के भी परीक्षा परिणाम आने वाले हैं।
नतीजों के बाद छात्रों के लिए यह है जरूरी
-अभिभावक असफल छात्रों की दूसरों से तुलना न करें
-अभिभावक अधिकांश समय बच्चों के साथ रहें और उन्हें अकेला न छोड़ें
-बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें
-स्कूल शिक्षकों द्वारा छात्रों का बेहतर मार्गदर्शन करें
-बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए काउंसिलिंग जरूरी
-नतीजों के बाद बच्चों को शांत रहने के लिए प्रोत्साहित करें, सकारात्मक सोच बढ़ाएं
-बच्चों को शारीरिक व्यायाम से जोड़ें, अच्छी नींद के लिए समय दें
-परिवार और दोस्तों से बात करें
-यदि आप तनाव से निपटने में संघर्ष कर रहे हैं, तो मदद मांगने में संकोच न करें