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Jammu News: कला और संस्कृति का दिखा संगम, 'मिटती विरासत' और 'नन्ही सुहागन' ने दर्शकों को किया आकर्षित

Tue, 15 Oct 2024 06:15 PM IST
निकिता गुप्ता गौरव रावत, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
गौरव रावत, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Tue, 15 Oct 2024 06:15 PM IST
सार

जम्मू में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी और कार्यशाला में कलाकारों ने अपनी मन की अभिव्यक्ति को कैनवास पर उकेरकर सामाजिक मुद्दों और विरासत के मिटने पर प्रकाश डाला।

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Jammu News: The confluence of art and culture was visible, 'Mati Virasat' and 'Nanhi Suhagan' attracted the au
जम्मू कला प्रदर्शनी - फोटो : निखिल मेहता

विस्तार

जम्मू कला केंद्र में कला और कलाकारों का संगम देखने को मिला जहां प्रदर्शनी में कुछ कलाकृतियां लगी हुई हैं और  कुछ अभी बन रही हैं। कलाकार अपनी मन की अभिव्यक्ति को कैनवास पर उकेर रहे हैं। जो कलाकृतियां कैनवास पर उकेरी जा चुकी हैं, उनमें प्रकृति के अनूठे रंग भी हैं, तो समस्याएं हैं और चुनौतियां भी हैं। कुछ बहुत जरुरी मुद्दों को भी उठाती हैं। मौका है तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी और कार्याशाल का। यहां हमें क्या-क्या देखने को मिला, आइये आपको भी दिखाते हैं।

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सबसे पहले बात करते हैं बबीता हाडा की पेंटिंग ‘मिटती विरासत’ की। बबीता सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी, जम्मू में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। ‘मिटती विरासत’ बड़े सलीके से समय के बदलाव के साथ हमारी मिटती संस्कृति के बारे में सचेत करती है। साथ ही सन्देश देती है कि ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हम अपनी सांस्कृतिक विरासत के बारे में सिर्फ किताबों में ही पढ़ेंगे। बबीता की दूसरी पेंटिंग ‘ख्वाहिशों की चादर’ भी मानवीय पहलुओं को छूती दिखती है। इसका संदेश है कि इंसान की ख्वाहिशें कभी पूरी नहीं होती। एक ख्वाहिश पूरी हो भी जाती है, तो दूसरी पैदा हो जाती है। और इसी क्रम में इंसान बूढा हो जाता है।

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अब बात करते हैं ग्वालियर से आई तितिक्षा सैनी की। तितिक्षा की पेंटिंग का नाम है ‘नन्ही सुहागन’। नन्ही सुहागन ऐसी है कि आपको सोचने के लिए मजबूर कर देगी। ये एक ऐसी महिला है, जिसकी उम्र तो शादी लायक है, लेकिन वह शादी न करके अपने सपनों को जीना चाहती है। पितृसत्तात्मक समाज में उसकी कहां चलने वाली है।

इसलिए शादी करके वो सामाजिक बंधनों को ढो रही है और रोज घुट-घुट कर मर रही है। तितिक्षा की दूसरी पेंटिंग ‘द अलाइव मदर’ भी महिलाओं के खिलाफ होने वाले शोषण को दर्शाती है, जिसे देखने के बाद आप भीतर से झकझोर जाएंगे। कला केंद्र में प्रदर्शनी के साथ-साथ कार्यशाला का भी आयोजन किया गया है। जिसमें कई विधार्थी वरिष्ठ कलाकारों से चित्रकारी के गुर सीख रहे हैं।

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