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भारत माता के जयघोष के बीच शहीद शफीक को किया सुपुर्द-ए खाक
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रियासी। जिले के दूरदराज ममनकोट क्षेत्र में मंगलवार दोपहर को भारत माता के जयकारों के साथ शहीद जवान शफीक अली के पार्थिव शरीर को सपुर्द ए खाक किया गया। सोमवार को श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र जेवन में बस पर हुए आतंकी हमले में शफीक अली पुत्र अब्दुल रशीद शहीद हो गए थे।
मंगलवार सुबह शहीद का शव गीतानगर स्थित जिला पुलिस लाइन पहुंचा, जहां डीडीसी चेयरमैन सर्राफ सिंह नाग, डीसी चरणदीप सिंह, एसएसपी शैलेंदर सिंह और पूर्व राज्यमंत्री अजय नंदा ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। बाद में सड़क मार्ग से शहीद के शव को माहौर की तरफ ले जाया गया। पूरे रास्ते में उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा।
सलाल, अरनास, दरमाड़ी, माहौर, साड़, बग्गा व चसाना जैसे मुख्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सड़क किनारे जमा रहे। जैसे ही शहीद का शव वाहन वहां से गुजरा, लोगों ने भारत माता की जय और शहीद जवान अमर रहे के नारे लगाए गए। दोपहर लगभग तीन बजे जवान का शव पैतृक गांव ममनकोट पहुंचा, जहां ग्रामीणों की भारी भीड़ ने जोरदार नारेबाजी की।
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इस दौरान शहीद के घर तक लोगों की लंबी कतार लगी रही। घर में पूरी विधि करने के बाद शहीद के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। शहीद के 11 वर्षीय बेटे ने अपने पिता के शव पर नम आंखों से फूल चढ़ाते हुए उन्हें अंतिम विदाई दी। मौके पर माहौर पुलिस के उच्च अधिकारियों के साथ स्थानीय लोगों की भी भारी भीड़ उमड़ी।
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बच्चों और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल
नौवीं बटालियन के बेल्ट नंबर 782 शफीक अली निवासी ममनकोट चसाना माहौर के शहीद होने की सूचना जैसे ही उसके घर पर पहुंची, पूरे क्षेत्र में मातम का माहौल छा गया। नाते रिश्तेदार सोमवार रात को ही शहीद के घर पहुंचना शुरू हो गए थे। मंगलवार सुबह से दोपहर तक भी लोगों का आना जारी रहा। शहीद के घर के अंदर व बाहर महिलाएं विलाप करती दिखीं। कश्मीरी और गोजरी भाषा में वह आतंकियों के इस कृत्य की निंदा करती रहीं। तीन भाइयों में मंझले शफीक की 17 और 15 वर्ष की दो बेटियां हैं। वहीं, 11 वर्ष का उनका सबसे बड़ा बेटा है। इससे छोटे दो और बेटे हैं। पति की मौत की खबर सुन कर शहीद की पत्नी और उसके पांचों बच्चों का रो रोकर बुरा हाल था। रिश्तेदार उनको सांत्वना देते रहे।
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मंगलवार सुबह शहीद का शव गीतानगर स्थित जिला पुलिस लाइन पहुंचा, जहां डीडीसी चेयरमैन सर्राफ सिंह नाग, डीसी चरणदीप सिंह, एसएसपी शैलेंदर सिंह और पूर्व राज्यमंत्री अजय नंदा ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। बाद में सड़क मार्ग से शहीद के शव को माहौर की तरफ ले जाया गया। पूरे रास्ते में उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा।
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सलाल, अरनास, दरमाड़ी, माहौर, साड़, बग्गा व चसाना जैसे मुख्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सड़क किनारे जमा रहे। जैसे ही शहीद का शव वाहन वहां से गुजरा, लोगों ने भारत माता की जय और शहीद जवान अमर रहे के नारे लगाए गए। दोपहर लगभग तीन बजे जवान का शव पैतृक गांव ममनकोट पहुंचा, जहां ग्रामीणों की भारी भीड़ ने जोरदार नारेबाजी की।
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इस दौरान शहीद के घर तक लोगों की लंबी कतार लगी रही। घर में पूरी विधि करने के बाद शहीद के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। शहीद के 11 वर्षीय बेटे ने अपने पिता के शव पर नम आंखों से फूल चढ़ाते हुए उन्हें अंतिम विदाई दी। मौके पर माहौर पुलिस के उच्च अधिकारियों के साथ स्थानीय लोगों की भी भारी भीड़ उमड़ी।
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बच्चों और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल
नौवीं बटालियन के बेल्ट नंबर 782 शफीक अली निवासी ममनकोट चसाना माहौर के शहीद होने की सूचना जैसे ही उसके घर पर पहुंची, पूरे क्षेत्र में मातम का माहौल छा गया। नाते रिश्तेदार सोमवार रात को ही शहीद के घर पहुंचना शुरू हो गए थे। मंगलवार सुबह से दोपहर तक भी लोगों का आना जारी रहा। शहीद के घर के अंदर व बाहर महिलाएं विलाप करती दिखीं। कश्मीरी और गोजरी भाषा में वह आतंकियों के इस कृत्य की निंदा करती रहीं। तीन भाइयों में मंझले शफीक की 17 और 15 वर्ष की दो बेटियां हैं। वहीं, 11 वर्ष का उनका सबसे बड़ा बेटा है। इससे छोटे दो और बेटे हैं। पति की मौत की खबर सुन कर शहीद की पत्नी और उसके पांचों बच्चों का रो रोकर बुरा हाल था। रिश्तेदार उनको सांत्वना देते रहे।