जम्मू-कश्मीर: ढांगरी हत्याकांड के कातिलों का दो माह बाद भी सुराग नहीं, ग्रामीणों में लगातार बढ़ रहा आक्रोश
जनवरी में आतंकियों ने दो बच्चों समेत सात लोगों की हत्या कर दी थी। दो माह बीत जाने के बाद भी अब तक पुलिस और अन्य एजेंसियां यह पता नहीं लगा पाई कि हमले को किसने अंजाम दिया और हत्यारे कहां हैं।
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राजोरी में ढांगरी हत्याकांड के दो महीने बाद भी सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में खाली हाथ हैं। दो माह में जांच पूरी करने के लिए प्रशासन और पुलिस ने दो बार समय मांगा। पुलिस दोनों बार ही कोई सबूत नहीं जुटा पाई है। अब तीसरी बार फिर से पुलिस ने पीड़ित परिवारों और संगठनों से समय मांगा है।
लेकिन हकीकत तो यह है कि पुलिस और तमाम सुरक्षा एजेंसियों का इतना बड़ा नेटवर्क अभी तक आतंकियों का पता लगाने में नाकाम हुआ है। वर्ष के पहले ही दिन आतंकियों ने हिंदु परिवारों पर हमला किया था।
इसमें दो बच्चों समेत सात लोगों की हत्या कर दी गई। वारदात के कुछ घंटे बाद ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी अब तक यह सुराग हाथ नहीं लगा कि इस हमले को किसने अंजाम दिया और हत्यारे कहां हैं।
दो बार टाली भूख हड़ताल
ढांगरी के पीड़ित परिवारों ने सामाजिक और हिंदु संगठनों के साथ मिलकर भूख हड़ताल करने का फैसला किया था। पहले जनवरी में सहमति बनी तो पुलिस ने कहा कि उन्हें वक्त दिया जाए। लोगों ने बात मान ली।
जब कुछ नहीं हुआ तो फिर हड़ताल करने की सहमति बनी। 20 फरवरी तक का वक्त मांगा गया, लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ। तब पुलिस ने दोबारा समय मांगा और कहा कि 20 मार्च तक का समय दिया जाए।
अंतिम चेतावनी, इसके बाद आमरण अनशन
इस हत्याकांड में पीड़ित सरोज वाला के दोनों बेटों की हत्या कर दी गई। सरोज का कहना है कि पुलिस ने हमसे दो बार का वक्त मांगा। दोनों ही बार वह कुछ नहीं कर पाए। अब फिर से 20 मार्च तक का समय मांगा गया है।
यह अब अंतिम अवसर है। इसके बाद हम आमरण अनशन पर बैठेंगे। मेरे दो जवान बच्चों की हत्या कर दी गई। जब तक कातिलों को नहीं मारा जाता। तब तक सुकून नहीं मिलेगा।
इस हत्याकांड को अंजाम देकर आतंकी कुछ ही घंटों बाद गायब हो गए। इतनी बड़ी वारदात किसी स्थानीय मदद के बिना नहीं की जा सकती। अब तक न तो किसी स्थानीय की जानकारी सामने आई। न ही इसे अंजाम देने वालों का पता चला। पुलिस और खुफिया एजेंसियों का इतना बड़ा नेटवर्क है। बावजूद इसके आरोपियों का पता न चलना सवाल खड़े करता है। अब तीसरी बार फिर से समय मांगा गया है। अब भी कुछ नहीं हुआ तो आमरण अनशन के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं बचेगा।- धीरज कुमार शर्मा, सरपंच, डांगरी
बड़े अधिकारी जवाब नहीं दे रहे
इस मामले में डीजीपी दिलबाग सिंह और आईजी मुकेश सिंह से बात करने की कोशिश की गई। हम सिर्फ उनसे यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि इसमें अब तक पुलिस और अन्य की कार्रवाई क्या रही। लेकिन दोनों उच्च अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। बड़े अधिकारी जब भी इसमें बात करेंगे। उनकी बात प्रमुखता से प्रकाशित की जाएगा।