आतंकी हमले: कश्मीर घाटी में वीआईपी दौरों में बढ़ गए आतंकी हमले, हो रही टारगेट किलिंग
घाटी में आतंकी हमलों पर विपक्षी दलों ने कहा कि मंत्रियों के दौरों पर लगाए रखा है सुरक्षा ग्रिड, सुरक्षाबलों का ध्यान भटका हुआ है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कश्मीर में आतंकी घटनाओं में वृद्धि के लिए विपक्षी दलों ने हाई प्रोफाइल सियासी लोगों के दौरों को जिम्मेदार ठहराया है। विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्रीय मंत्रियों के अत्यधिक दौरों से सुरक्षा ग्रिड को वीआईपी दौरों के लिए व्यस्त कर दिया गया। इससे आतंकियों को वारदातें करने के पर्याप्त मौके मिले, जिसके नतीजे सबके सामने हैं। जानकारी के अनुसार घाटी में मंत्रियों, संसदीय प्रतिनिधिमंडल, न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिकारियों सहित 300 से अधिक वीआईपी दौरे हुए हैं। इनमें नरेंद्र मोदी सरकार के करीब 70 मंत्री भी शामिल थे।
प्रदेश कांग्रेस के महासचिव सुरिंदर सिंह चन्नी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब से मोदी सरकार बनी है तब से जम्मू-कश्मीर को प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें पहले बैक-टू-विलेज चलता रहा। उसमें भी मंत्रियों का आना-जाना रहा और वो हर इलाके में घूमते रहे, जिससे एसएचओ से लेकर एसएसपी तक सभी उनके इर्दगिर्द घूमते रहे। बीते डेढ़ माह में जितने मंत्री यहां आए हैं, इतना हुजूम इससे पहले कभी नहीं देखा। आतंकी गावों से शहरों की ओर और जंगलों से बस्तियों तक पहुंचकर टारगेट किलिंग कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के नेता जगमोहन सिंह रैना ने कहा कि कश्मीर घाटी में 300 से अधिक वीआईपी शख्सियतों के दौरे से सुरक्षा अमले का ध्यान भटका है। कश्मीर में आतंकी घटनाएं अचानक बढ़ गई हैं। रैना ने यह भी कहा कि एक कारण पिस्तौल जैसे छोटे हथियारों की सीमा पार से तस्करी भी है, जिनसे आतंकियों को वारदातों को अंजाम देने में आसानी होती है। मंत्री आए लेकिन आम जनता के बजाय अपने लोगों से ही मिलते रहे।
यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: पुलिस से शिकायत व मदद के लिए अब सिर्फ मोबाइल एप पर करें क्लिक, मिलेंगी यह सुविधा
30 बार आंतरिक सुरक्षा में लगाई गई सेना
सुरक्षा ग्रिड के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि कम से कम 30 मौकों पर आंतरिक क्षेत्रों में वीआईपी दौरे के सेना की तैनाती की गई। खासकर उत्तरी और दक्षिण कश्मीर के ग्रामीण इलाकों में जहां खतरा अधिक है। एक अधिकारी ने कहा कि सुरक्षाबल या तो ऑपरेशन पर या वीआईपी यात्राओं पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। ऐसे दौरे आतंकवाद विरोधी अभियानों में बाधा डाल रहे हैं। एक बड़ी चुनौती हाइब्रिड आतंकी मॉड्यूल की भी है, जो पिस्तौल और ग्रेनेड से हमलों को अंजाम देकर अपने सामान्य कार्यों में लग जाते हैं। पुलिस की सूची में उनका नाम न होने से उन पर शक नहीं जाता।