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जम्मू-कश्मीर: राज्यपाल की सुरक्षा के लिए बनेगी अलग सिक्योरिटी फोर्स, एसएसी ने लिया फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Mon, 10 Dec 2018 01:41 PM IST
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सत्यपाल मलिक
- फोटो : फाइल
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राज्यपाल और उनके परिवार की सुरक्षा और उनसे जुड़े मामलों के लिए अलग सिक्योरिटी फोर्स का गठन किया जाएगा। इससे संबंधित बिल को रविवार राज्य सलाहकार परिषद (एसएसी) की बैठक में मंजूरी दे दी गई। इस बिल में फोर्स के गठन और रेगुलेशन का प्रावधान रखा गया है। इससे पहले जम्मू कश्मीर स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप एक्ट 2000 में इसका प्रावधान नहीं था। सरकार ने महसूस किया कि इस राज्यपाल की सुरक्षा और उनके परिवार की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए अलग फोर्स की आवश्यकता है।
कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर में संशोधन को मंजूरी
बैठक में कोड आफ सिविल प्रोसीजर समवत 1977 बिल में संशोधन को भी मंजूरी दी गई है। इस संशोधन से सिविल कोर्ट में आने वाले मामलों को जल्द से निपटाया जा सकेगा। बिना मतलब के मामलों को वक्त पर निपटाने में मदद मिलेगी। संशोधन के बाद मामलों को निपटाने की एक समय सीमा तय की जा सकेगी।
बेनामी लेन देन पर लगेगी रोक, 7 साल की होगी सजा
रियासत में होने वाले बेनामी लेन देन पर भी अब अंकुश लगेगा। एसएसी की बैठक में बेनामी संपत्ति लेनदेन विधेयक, 2018 बिल को भी मंजूरी दे दी गई। बिल को मंजूरी मिलने के बाद अब एक ऐेसा प्रशासनिक तंत्र विकसित किया जाएगा, जो न सिर्फ इस प्रकार के लेन देन को रोकेगा बल्कि इस बेनामी संपत्ति को अटैच कर सकेगा। यदि इसमें कोई दोषी पाया गया तो उसको सजा का प्रावधान भी इसमें रखा गया है। आरोपी को कम से कम सात साल की सजा का प्रावधान है। मार्केट वैल्यू के हिसाब से ऐसी संपत्ति की 25 फीसदी कीमत का जुर्माना भी लगेगा। बेनामी लेन देन वे हैं जो एक काल्पनिक नाम के तहत किए जाते हैं अथवा बनाए जाते हैं, या मालिक संपत्ति के स्वामित्व से अवगत नहीं है, या संपत्ति के लिए भुगतान करने वाला व्यक्ति पता लगाने योग्य नहीं है।
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कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर में संशोधन को मंजूरी
बैठक में कोड आफ सिविल प्रोसीजर समवत 1977 बिल में संशोधन को भी मंजूरी दी गई है। इस संशोधन से सिविल कोर्ट में आने वाले मामलों को जल्द से निपटाया जा सकेगा। बिना मतलब के मामलों को वक्त पर निपटाने में मदद मिलेगी। संशोधन के बाद मामलों को निपटाने की एक समय सीमा तय की जा सकेगी।
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बेनामी लेन देन पर लगेगी रोक, 7 साल की होगी सजा
रियासत में होने वाले बेनामी लेन देन पर भी अब अंकुश लगेगा। एसएसी की बैठक में बेनामी संपत्ति लेनदेन विधेयक, 2018 बिल को भी मंजूरी दे दी गई। बिल को मंजूरी मिलने के बाद अब एक ऐेसा प्रशासनिक तंत्र विकसित किया जाएगा, जो न सिर्फ इस प्रकार के लेन देन को रोकेगा बल्कि इस बेनामी संपत्ति को अटैच कर सकेगा। यदि इसमें कोई दोषी पाया गया तो उसको सजा का प्रावधान भी इसमें रखा गया है। आरोपी को कम से कम सात साल की सजा का प्रावधान है। मार्केट वैल्यू के हिसाब से ऐसी संपत्ति की 25 फीसदी कीमत का जुर्माना भी लगेगा। बेनामी लेन देन वे हैं जो एक काल्पनिक नाम के तहत किए जाते हैं अथवा बनाए जाते हैं, या मालिक संपत्ति के स्वामित्व से अवगत नहीं है, या संपत्ति के लिए भुगतान करने वाला व्यक्ति पता लगाने योग्य नहीं है।
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