अपराधी की पहचान होगी आसान: एक फिंगरप्रिंट से सामने आएगा का काला चिठ्ठा, जानें J&K पुलिस की हाईटेक प्लानिंग
जम्मू-कश्मीर के हर जिले में राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) लैब शुरू की गई हैं, जहां अपराधियों के फिंगरप्रिंट संग्रहित किए जा रहे हैं।
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अपराधियों की कुंडली अब उनके फिंगरप्रिंट में छुपी होगी। देश के अन्य राज्यों की तरह अब जम्मू-कश्मीर पुलिस भी अपराधियों के फोटो के साथ-साथ उनके फिंगरप्रिंट को भी संग्रहित कर रही है। इसमें बार-बार अपराध करने वाले अपराधियों की कुंडली को आसानी से खोला जा सकेगा और उन्हें पकड़ने में भी आसानी होगी।
इसके लिए जम्मू-कश्मीर के हर जिले में राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) लैब शुरू की गई हैं, जहां अपराधियों के फिंगरप्रिंट संग्रहित किए जा रहे हैं। इसके लिए सभी जिलों में पुलिस की टीम को प्रशिक्षण भी दिया गया है।
अपराधियों की धरपकड़ और अपराध के सबूत जुटाने में फिंगरप्रिंट पुलिस के लिए काफी मददगार होते हैं। जम्मू जिले में इसके लिए हाल ही में राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) लैब शुरू की गई है, जहां अपराधियों के फिंगरप्रिंट का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।
इसमें आतंकी मदद, मवेशी तस्करी, नशा तस्करी जैसे अपराधों में शामिल लोगों पर आसानी से शिकंजा कसा जा सकेगा। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अपराधी को न्यायालय में पेश करने से पहले उसके फोटो और फिंगरप्रिंट लिए जा रहे हैं। इनको लैब में ऑनलाइन अपडेट किए जा रहा है। इसके लिए जम्मू सहित संभाग के सभी जिलों में थानेदारों को फिंगरप्रिंट स्कैनर मिल गया है। पुलिस इन फिंगरप्रिंट को जोड़ेगी। फिंगरप्रिंट लेने वाली पुलिस टीम को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
अपराधी एक अपराध करने के बाद दूसरे जिलों या किसी भी स्थान पर नाम बदलकर रहने लगते हैं। वहां भी इसी तरह के अपराधों को अंजाम देते हैं। फिंगर प्रिंट संग्रहित होने के बाद अपराधी की यह चालबाजी भी नहीं चलेगी। फिंगरप्रिंट से पुराने नाम और पुराने अपराध की कुंडली भी पुलिस के सामने खुल जाएगी।
सभी जिलों में राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) लैब शुरू की गई हैं। वहां काम हो रहा है। अपराधियों के फिंगरप्रिंट का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। - आनंद जैन, एडीजीपी, जम्मू जोन।