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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu Kashmir: Orthopedic Hospital in Jammu could not completed even in 53 months

जम्मू-कश्मीर: स्वास्थ्य परियोजनाओं में लेटलतीफी जारी, हड्डी जोड़ रोग अस्पताल 53 माह में भी नहीं बन पाया पूरा

Sat, 27 May 2023 03:53 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 27 May 2023 03:53 PM IST
सार

जम्मू संभाग के दस जिलों में लंबे समय से आर्थो क्षेत्र का विस्तार नहीं हो पाया है। जीएमसी के आर्थो विभाग में मौजूदा चार ऑपरेशन थियेटर चल रहे हैं जिसमें से अमूमन तीन ही चालू रहते हैं।

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Jammu Kashmir: Orthopedic Hospital in Jammu could not completed even in 53 months
जम्मू में अस्पताल की प्रोजक्ट साइट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार लोगों को आधुनिक चिकित्सा सेवाएं देने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं। स्वास्थ्य परियोजनाओं में लेटलतीफी जारी है। कई प्रतिष्ठित परियोजनाएं बार बार डेडलाइन के बाद भी पूरी नहीं हो पाई हैं। महेशपुरा चौक जम्मू स्थित नवनिर्मित बोन एंड ज्वाइंट (हड्डी व जोड़) अस्पताल की परियोजना को 24 माह में पूरा किया जाना था, लेकिन 53 माह बीत जाने के बाद भी अभी इसे शुरू नहीं किया जा सका है।

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नतीजतन शहरवासियों के साथ संभाग के अन्य लोगों को आधुनिक आर्थो चिकित्सा सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। जम्मू संभाग के दस जिलों में लंबे समय से आर्थो क्षेत्र का विस्तार नहीं हो पाया है। जीएमसी के आर्थो विभाग में मौजूदा चार आपरेशन थियेटर चल रहे हैं। जिसमें से अमूमन तीन ही चालू रहते हैं।
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इसमें फ्रैक्चर, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, टांगों, टेढ़े पैर, जन्म से बच्चों में आर्थो समस्याएं, हड्डियों में गैंगरेन, रीढ़ की हड्डी, मल्टीपल फ्रैक्चर, खराब आर्थो मामलों को ठीक करना आदि चिकित्सा दी जाती है। इन थियेटरों में रूटीन में 10 से 12 आर्थो के आपरेशन हो रहे हैं। 

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नए बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल में सात आर्थो थियेटर का निर्माण किया गया है, जिसमें पांच सामान्य और दो डे केयर होंगे, लेकिन अस्पताल के शुरू नहीं हो पाने के कारण मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। 45 करोड़ रुपये की इस 182 बिस्तर वाली परियोजना को दिसंबर 2018 में शुरू किया गया था और इसे दो साल में पूरा किया जाना था।

 

हालांकि कोविड के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुए, लेकिन आज करीब साढ़े चार साल बीत जाने के बाद भी परियोजना को जनता को समर्पित नहीं किया जा सका है। इसे पहले जनवरी 2021, फिर अगस्त 2022 और फिर मई 2023 में शुरू करने के लिए डेडलाइन रखी गई। लेकिन मई भी लगभग निकल गया है, मगर अस्पताल को शुरू करने को लेकर कोई प्रक्रिया नहीं दिख रही है। परियोजना में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और अन्य तीन मंजिला स्थापित है 

स्टाफ पदों की मंजूरी पर पेंच 

सूत्रों के अनुसार बोन एंड ज्वाइंड अस्पताल के लिए पहले करीब साढ़े चार सौ पदों को सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था, जिसमें अब संशोधन करके साढ़े तीन सौ से अधिक पद भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक प्रशासनिक स्तर से मंजूरी नहीं मिली है, जिससे यह भी सवाल है कि जब पदों को मंजूरी ही नहीं मिली है तो कब भर्ती होगी और कब अस्पताल में स्टाफ पहुंचेगा। 

ओपीडी जल्द शुरू करने के दावे, पर जमीन पर कुछ नहीं

जीएमसी जम्मू की प्रिंसिपल डाॅ. शशि सूदन के अनुसार बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल में जल्द रूटीन आपोडी शुरू करने की तैयारी की जा रही है। कोविड और फिर राशि की कमी के कारण परियोजना में कुछ देरी हुई है। लेकिन जमीनी स्तर पर देखा जाए तो अस्पताल में ओपीडी शुरू करने को लेकर अभी कोई हलचल नहीं हुई है।
 

अस्पताल में एक चिकित्सा अधीक्षक के अलावा अन्य किसी भी स्टाफ सदस्य की तैनाती नहीं की गई है। चिकित्सा अधीक्षक अकेले आते हैं और कामकाज देखकर चले जाते हैं। ओपीडी केंद्र पर कोई कंप्यूटर स्थापित नहीं किया गया है। हालांकि फिजियोथैरेपी के कुछ उपकरण यहां लाने की बात की जा रही है, लेकिन अभी तक अस्पताल में कुछ नहीं है।

अस्पताल के स्टोर में पड़ा है  फर्नीचर 

बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल के बेसमेंट में लाखों रुपये का नया फर्नीचर धूल चाट रहा है, लेकिन उसे अभी तक अस्पताल में स्थापित नहीं किया गया है। मजेदार बात यह है कि फर्नीचर व अन्य दूसरे सामान की देखरेख के लिए कोई स्टोरकीपर ही नहीं है, जिससे ये सामान राम भरोसे ही पड़ा हुआ है।

सत्यापन के बाद ही जीएमसी प्रशासन अपने अधीन लेगा अस्पताल

आरएंडबी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल का निर्माण लगभग पूरा कर लिया गया है और जीएमसी प्रशासन को इसे अपने अधीन लेने के लिए कहा गया है। वहीं दूसरी ओर बताया जा रहा है कि जीएमसी प्रशासन को एक समिति का गठन करने को कहा गया है जो डीपीआर के मुताबिक अस्पताल में किए गए निर्माण व अन्य दूसरे कार्यों का सत्यापन करेगी, जिसके बाद ही उसे अपने अधीन लेगी। यह प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं की गई है। 

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