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सियासत: गैर स्थानीय मतदाता के मुद्दे पर जनता के बीच जाएगा विपक्ष, दिवाली के बाद घेरेंगे सरकार को
Tue, 18 Oct 2022 01:47 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Tue, 18 Oct 2022 01:47 PM IST
सार
अब तक गैर स्थानीय मतदाताओं के मुद्दों पर सरकार और प्रशासन की ओर से अलग-अलग स्पष्टीकरण दिया जाता रहा है। पहले 25 लाख नए मतदाताओं को लाने की बात कही गई, लेकिन बाद में इस बयान को वापस ले लिया गया।
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Jammu
- फोटो : निखिल मेहता
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में 25 लाख नए वोटरों के मामले में विपक्षी दलों ने जनता के बीच जाकर भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ जागरूक करने का फैसला किया है। इन दलों का यह मोर्चा दिवाली के बाद राजधानी जम्मू और श्रीनगर में संयुक्त रूप से बड़ा प्रदर्शन कर गैर स्थानीय मतदाताओं का विरोध करेगा।
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गैर स्थानीय मतदाताओं के मामले में सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया गया है। नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के आवास पर सोमवार को करीब डेढ़ घंटा चली सर्वदलीय बैठक में यह फैसले किए गए।
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सर्वदलीय समिति के संयोजक नेकां सांसद हसनैन मसूदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन्होंने कहा कि अब तक गैर स्थानीय मतदाताओं के मुद्दों पर सरकार और प्रशासन की ओर से अलग-अलग स्पष्टीकरण दिया जाता रहा है। पहले 25 लाख नए मतदाताओं को लाने की बात कही गई, लेकिन बाद में इस बयान को वापस ले लिया गया।
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उसके बाद जिला उपायुक्त जम्मू की ओर से गैर स्थानीय मतदाताओं के लिए गाइडलाइन जारी करके इस अंदेशे को और पुख्ता कर दिया गया, लेकिन विरोध के बाद चौबीस घंटे में जिला उपायुक्त की ओर से एक ट्वीट के माध्यम से आदेश को वापस ले लिया गया। मगर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
विपक्षी दलों के नेताओं की रिपोर्ट के मुताबिक अंदर खाते गैर स्थानीय मतदाताओं को जम्मू-कश्मीर की चुनावी प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। अगर जिला उपायुक्त को स्पष्टीकरण देना था तो उन्हें यह जनता के बीच सार्वजनिक करना चाहिए था। अब जम्मू के लोग भी समझ रहे हैं कि उनके साथ धोखा किया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर में महाराजा के 1957 के कानून के तहत सांविधानिक तौर पर स्टेट सब्जेक्ट वालों को ही मतदान का अधिकार था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हमारी पहचान को खत्म कर दिया गया है। हमारी नौकरियों और भूमि से जुड़ा मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। हम देश के साथ हैं, लेकिन संविधान के तहत अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएंगे। इसमें बड़े क्षेत्रीय दलों को शामिल किया जाएगा।
बाहरी मतदाताओं को नहीं लाने दिया जाएगा। जम्मू और कश्मीर के मतदाताओं को एक साजिश के तहत बाहर किया जा रहा है। हम इस मुद्दे पर एकजुट हैं। समिति की ओर से रणनीति फैसलों को डा. फारूक के समक्ष रखा जाएगा। इससे पहले डा. फारूक अब्दुल्ला की अध्यक्षता में श्रीनगर और जम्मू में सभी दलों के साथ बैठक की गई थी, जिसके बाद एक 14 सदस्यीय समिति का गठन करके अगली रणनीति बनाने को कहा गया था। इस मौके पर शिव सेना से मनीश साहनी, नेकां से रतन लाल गुप्ता, शेख अब्दुल बशीर, कांग्रेस से रमण भल्ला, पीडीपी से सरदार अमरीक सिंह के अलावा सुनील डिंपल, आशिक हुसैन, शुजा जफर मौजूद रहे।