जम्मू-कश्मीर: रोड पर चलते बिक गई जेकेएएस अफसर की गाड़ी, हाई सिक्योरिटी नंबर जम्मू, चेचिस नंबर दिल्ली का मिला
पुलिस ने कश्मीर के पुलवामा के रहने वाले दोनों वकीलों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। मामले को लेकर राजबाग पुलिस ने मामला दर्ज कर डीलर के खिलाफ भी छानबीन शुरू कर दी है।
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कठुआ जिले में तैनात एक जेकेएएस अधिकारी की सड़क पर चलती गाड़ी को कश्मीर में बैठे डीलर ने बेच डाला। बड़ी बात यह कि कागज भी अधिकारी के नाम से बना दिए। इस बात का खुलासा वीरवार को उस समय हुआ जब समाज कल्याण अधिकारी अब्दुल रहीम का ध्यान हीरानगर से कठुआ आते वक्त सुबह 11 बजे अपनी गाड़ी के आगे चल रही दूसरी गाड़ी की नंबर प्लेट पर गया।
उन्होंने देखा कि आगे वाली गाड़ी का नंबर ((जेके11सी9988) भी उनकी गाड़ी से मेल खाता है। शक होने पर उन्होंने तुरंत राजबाग थाने को सूचित किया। सूचना पर पुलिस ने चड़वाल के पास गाड़ी को रुकवा लिया। इसमें सवार दो वकीलों से कागज मांगे तो इन्होंने अधिकारी को परेशानी में डाल दिया।
गाड़ी का नंबर ही नहीं आरसी और इंश्योरेंस भी उन्हीं के नाम पर निकला। चेचिस नंबर चेक करवाया तो पता चला कि यह दिल्ली में पंजीकृत गाड़ी का है। पुलिस ने पहले सोचा कि चोरी की गाड़ी पर यह लगाया होगा लेकिन जब दिल्ली में पंजीकृत गाड़ी के मालिक को फोन किया तो उसने कहा कि गाड़ी तो घर के सामने लगी है।
उसने इसका वीडियो भी पुलिस को भेजा। हैरानी की बात यह भी है कि गाड़ी पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगी थी। इसके बाद पुलिस ने कश्मीर के पुलवामा के रहने वाले दोनों वकीलों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। मामले को लेकर राजबाग पुलिस ने मामला दर्ज कर डीलर के खिलाफ भी छानबीन शुरू कर दी है।
दिल्ली नंबर की गाड़ी के चेचिस नंबर को इस्तेमाल किया
वकीलों की तरफ से खरीदी गई गाड़ी में जो चेचिस नंबर लगा था वो दिल्ली में एक सेवानिवृत्त आरटीओ की गाड़ी का था। दोनों ही ब्रेजा गाड़ियों में अंतर कर पाना भी मुश्किल था। दोनों गाड़ियां ग्रे रंग की थीं। यहां तक कि फर्जी चेचिस नंबर के लिए इस्तेमाल गाड़ी भी ब्रेजा थी और उसका रंग भी यही था।
फर्जी नंबर की गाड़ी नहीं कराई थी पंजीकृत, अब फंसा
सीनियर जेकेएएस अधिकारी की गाड़ी के नंबर स दूसरी गाड़ी के मामले में कई हैरानीजनक खुलासे हुए हैं। हिरासत में लिए वकीलों ने बताया कि यह गाड़ी उन्होंने तकरीबन 15 दिन पहले ही श्रीनगर के पंथा चौक में एक डीलर से खरीदी थी। जिला समाज कल्याण अधिकारी अब्दुल रहीम ने बताया कि यह बड़ा फर्जीवाड़ा है।
उन्होंने थाना राजबाग में लिखित शिकायत दर्ज करवाकर जांच के लिए कहा है। अब सवाल यह है कि आतंकवाद प्रभावित कश्मीर में कोई भी इस तरह की गाड़ियों का इस्तेमाल कर बड़ी वारदात को अंजाम दे सकता है। इस मामले ने कई सवाल और खड़े कर दिए हैं।
बड़ी बात यह है कि क्या कार डीलर पंजीकृत हैं भी या नहीं? जिस एजेंसी ने नंबर प्लेट लगाई उससे कैसे नंबर पकड़ में नहीं आया? क्या ऐसी नंबर प्लेट घर पर अन्य साधनों से बनाई जा सकती हैं? इन सब सवालों के जवाब पुलिस ढूंढने में जुटी है।
वहीं, मामले को अगर जम्मू कश्मीर प्रदेश की सुरक्षा के साथ जोड़कर देखा जाए तो यह मामला बेहद गम्भीर है, क्योंकि प्रदेश में अपराध में इस्तेमाल की जाने वाली गाड़ियों पर फर्जी नम्बर लगाया गया होता है। इस गाड़ी पर लगी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट इस तरफ इशारा करती है कि इसमें भी कहीं फर्जीवाड़ा तो नहीं हो रहा।
वकील होते हुए भी खरीदार ने न तो वाहन के कागज जांचे और न ही पंजीकरण अपने नाम पर करवाया। इस गाड़ी को खरीदार 15 दिन से चला रहा था। अगर कठुआ की तरफ आते हुए अधिकारी अपनी गाड़ी का नंबर नहीं देखता तो हो सकता था कि यह गाड़ी और कई साल चलती और पकड़ में नहीं आती।
कार खदीदने वालों के लिए भी यह एक सबक है कि बिना जांचे वाहन खरीदने पर आप मुसीबत में पड़े सकते हो फिर चाहे आप वकील या इससे भी ज्यादा रसूखदार क्यों न हों।