{"_id":"6769c8278f29a455130bf897","slug":"jammu-kashmir-newsa-jammu-news-c-10-lko1027-508822-2024-12-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"शादी का झांसा देकर सहमति से संबंध बनाना भी दुष्कर्म: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शादी का झांसा देकर सहमति से संबंध बनाना भी दुष्कर्म: हाईकोर्ट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। शादी का झांसा देकर सहमति से शारीरिक संबंध बनाना भी दुष्कर्म ही माना जाएगा। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 90 के तहत इसके लिए माफी नहीं दी जा सकती। इसके लिए दुष्कर्म से संबंधित धाराओं में सजा का प्रावधान है। ये फैसला जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की जम्मू बेंच ने दुष्कर्म के आरोपी पर दर्ज हुई एफआइआर को रद्द करने वाली याचिका पर सुनवाई करने के बाद दिया है। जस्टिस जावेद इकबाल वानी ने आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया है।
शहर की ही रहने वाली एक महिला ने पौनी (रियासी) के रहने वाले सतपाल के खिलाफ दुष्कर्म और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। महिला ने आरोप लगाया कि साल 2016 में उसका सतपाल से संपर्क हुआ। जान पहचान बढ़ने के बाद सतपाल ने उसे लगातार शादी करने का आश्वासन दिया। इसके बाद दोनों में शारीरिक संबंध बन गए। सालों तक सतपाल शादी का झांसा देकर उससे संबंध बनाता रहा और आखिर में किसी दूसरी महिला से शादी कर ली। इसके बाद सतपाल ने उसे गर्भपात के लिए भी मजबूर किया।
साल 2021 में जिला न्यायालय के आदेश के बाद महिला की एफआईआर दर्ज की गई। इस पर सतपाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर को रद्द करने की मांग की। याचिकाकर्ता सतपाल के अधिवक्ता ने दलील दी कि दोनों के बीच सहमति से ही संबंध बनाए गए थे। केवल वादा तोड़ना ही दुष्कर्म नहीं माना जा सकता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि शुरू से ही याचिकाकर्ता का इरादा धोखाधड़ी का था।
विज्ञापन
इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जावेद इकबाल वानी की पीठ ने कहा कि यदि सहमति झूठा वादा करके प्राप्त की जाती है, विशेष रूप से शादी के मामले में, तो वह अमान्य मानी जाती है। पीठ ने आगे कहा कि यदि एफआईआर में लगाए गए आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो यह माना जाएगा कि याचिकाकर्ता ने योजनाबद्ध तरीके से धोखाधड़ी की है। इस तरह की हरकतें आईपीसी की धारा 375 के तहत परिभाषित दुष्कर्म के दायरे में आती हैं। इनमें आईपीसी की धारा 375 और 376 के तहत दुष्कर्म की सजा दी जा सकती है। कोर्ट ने आगे कहा कि एफआईआर को पहले ही रद्द करने से मामले की जांच की प्रक्रिया कमजोर होगी।
विज्ञापन
शहर की ही रहने वाली एक महिला ने पौनी (रियासी) के रहने वाले सतपाल के खिलाफ दुष्कर्म और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। महिला ने आरोप लगाया कि साल 2016 में उसका सतपाल से संपर्क हुआ। जान पहचान बढ़ने के बाद सतपाल ने उसे लगातार शादी करने का आश्वासन दिया। इसके बाद दोनों में शारीरिक संबंध बन गए। सालों तक सतपाल शादी का झांसा देकर उससे संबंध बनाता रहा और आखिर में किसी दूसरी महिला से शादी कर ली। इसके बाद सतपाल ने उसे गर्भपात के लिए भी मजबूर किया।
विज्ञापन
साल 2021 में जिला न्यायालय के आदेश के बाद महिला की एफआईआर दर्ज की गई। इस पर सतपाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर को रद्द करने की मांग की। याचिकाकर्ता सतपाल के अधिवक्ता ने दलील दी कि दोनों के बीच सहमति से ही संबंध बनाए गए थे। केवल वादा तोड़ना ही दुष्कर्म नहीं माना जा सकता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि शुरू से ही याचिकाकर्ता का इरादा धोखाधड़ी का था।
विज्ञापन
इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जावेद इकबाल वानी की पीठ ने कहा कि यदि सहमति झूठा वादा करके प्राप्त की जाती है, विशेष रूप से शादी के मामले में, तो वह अमान्य मानी जाती है। पीठ ने आगे कहा कि यदि एफआईआर में लगाए गए आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो यह माना जाएगा कि याचिकाकर्ता ने योजनाबद्ध तरीके से धोखाधड़ी की है। इस तरह की हरकतें आईपीसी की धारा 375 के तहत परिभाषित दुष्कर्म के दायरे में आती हैं। इनमें आईपीसी की धारा 375 और 376 के तहत दुष्कर्म की सजा दी जा सकती है। कोर्ट ने आगे कहा कि एफआईआर को पहले ही रद्द करने से मामले की जांच की प्रक्रिया कमजोर होगी।