{"_id":"67b246d5b8f7c3891b060c5a","slug":"jammu-kashmir-news-srinagar-news-c-266-1-sr31001-103582-2025-02-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"कश्मीर पंडितों की वापसी के लिए मुस्लिमों और पंडितों में सहमति जरूरी: मीरवाइज़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कश्मीर पंडितों की वापसी के लिए मुस्लिमों और पंडितों में सहमति जरूरी: मीरवाइज़
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज़ उमर फारूक ने कहा कि कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए मुसलमानों और कश्मीरी पंडितों में सहमति बनाने की जरूरत है। बडगाम में एक अंतरधार्मिक सम्मेलन के बाद मीरवाइज़ ने कहा, हम मानते हैं कि कश्मीरी पंडितों का मुद्दा एक मानवीय मुद्दा है। कश्मीरी मुसलमान, चाहे उनका संप्रदाय कुछ भी हो, चाहते हैं कि वे अपने घर लौटें और पहले की तरह सद्भावना और शांति से रहें।
उन्होंने कहा, बहुसंख्यक समुदाय को बैठकर कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी के लिए एक कार्य योजना पर चर्चा करनी होगी। हालांकि, कश्मीरी पंडितों को भी अपनी वापसी पर सहमति बनानी होगी, क्योंकि कुछ आवाजें इस समुदाय के भीतर हैं जो फूट डालने की कोशिश कर रही हैं। मीरवाइज़ ने बताया कि बहुसंख्यक समुदाय चाहता है कि कश्मीरी पंडित उस समावेशी समाज का हिस्सा बनें, जो यहां था, जहां सभी समुदाय एक साथ रहते थे।
उन्होंने कहा, कुछ आवाजें हैं जो दक्षिण कश्मीर में उनके लिए अलग बस्ती बनाना चाहती हैं, यह स्वीकार्य नहीं है। कश्मीरी पंडितों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समावेशी समाज का हिस्सा बनना चाहता है। इसलिए, उनके बीच भी सहमति बनाने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा, बहुसंख्यक समुदाय को बैठकर कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी के लिए एक कार्य योजना पर चर्चा करनी होगी। हालांकि, कश्मीरी पंडितों को भी अपनी वापसी पर सहमति बनानी होगी, क्योंकि कुछ आवाजें इस समुदाय के भीतर हैं जो फूट डालने की कोशिश कर रही हैं। मीरवाइज़ ने बताया कि बहुसंख्यक समुदाय चाहता है कि कश्मीरी पंडित उस समावेशी समाज का हिस्सा बनें, जो यहां था, जहां सभी समुदाय एक साथ रहते थे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा, कुछ आवाजें हैं जो दक्षिण कश्मीर में उनके लिए अलग बस्ती बनाना चाहती हैं, यह स्वीकार्य नहीं है। कश्मीरी पंडितों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समावेशी समाज का हिस्सा बनना चाहता है। इसलिए, उनके बीच भी सहमति बनाने की जरूरत है।
विज्ञापन