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Jammu News: कश्मीर में तेंदुए व भालू के हमले मेंे 3 साल में 36 की मौत
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श्रीनगर। कश्मीर में तेंदुए और भालू के हमले से तीन साल में 36 लोगों की मौत हो चुकी है। 5 दिसंबर को उत्तर कश्मीर के हंदवाड़ा स्थित शिरहामा गांव में तेंदुए ने दो साल के बच्चे को मौत के घाट उतार दिया। 2019 के बाद से इस क्षेत्र में 15वीं मौत है।
आंकड़ों के अनुसार 2022-2024 के बीच कश्मीर घाटी में मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण 36 मौतें, 261 चोटें और 10,303 संघर्ष के मामले दर्ज किए गए हैं। आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार बढ़ते के कारण लोगों को खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष में तेजी आने से ऐसे हादसे हर साल बढ़ रहे हैं। 2022-2023 के दौरान 3,262 घटनाओं की रिपोर्ट आई, जिनमें 15 मौतें और 99 चोटें दर्ज की गई। कश्मीर के उत्तरी हिस्से में इस संकट का सबसे अधिक असर पड़ा, जहां 1,606 घटनाएं और 10 मौतें दर्ज की गईं। दक्षिणी क्षेत्रों शोपियां और जलमग्न क्षेत्रों में 1 से 40 तक चोटों की विभिन्न डिग्रियां देखी गईं।
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2023-2024 में यह स्थिति और बिगड़ी, जहां 4,947 वन्यजीव संघर्ष के मामले दर्ज हुए। इनमें 12 मौतें और 83 लोग घायल हुए। उत्तरी कश्मीर में इस बार भी घटनाओं की संख्या सबसे अधिक रही। इसमें 2,873 मामले और 8 मौतें दर्ज की गईं। दक्षिणी क्षेत्र और शोपियां में चोटों में मामूली कमी आई, लेकिन जलमग्न क्षेत्रों में दो मौतें और एक चोट दर्ज की गई।
दिसंबर 2024 तक इस संकट का हल नहीं निकला है और अब तक 2,094 मामले सामने आए हैं, जिनमें 9 मौतें और 79 लोग घायल हुए।
आलोचकों का कहना है कि वन्यजीव विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण स्थानीय लोग तेंदुए, भालू और अन्य वन्यजीवों से लगातार खतरे में हैं। वरिष्ठ वन्यजीव अधिकारी ने इनमें मानव जनसंख्या का बढ़ना और वन्यजीवों के आवासों में घुसपैठ करना सहित कई प्रमुख कारण बताए।
हाल ही में उत्तरी कश्मीर में घटना में वन्यजीव अधिकारी उस समय घायल हो गए जब उन्होंने एक भालू को लकड़ी से पकड़ने की कोशिश की। भालू ने अधिकारी को काट लिया, लेकिन कुछ स्थानीय लोगों ने हस्तक्षेप किया और लकड़ियों से भालू को खदेड़ा, जिससे वन्यजीव अधिकारियों को अंततः उस जानवर को शांत और पकड़ने का मौका मिला। दक्षिणी कश्मीर के शोपियां में एक और घटना में तेंदुए को शांत किया गया, जब वहां के लोगों ने पत्थर फेंके और शोर मचाया, जिससे चार लोग घायल हो गए। एक अधिकारी ने कहा, कर्मचारियों की क्षमता को बढ़ाना होगा और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों का गठन किया जाना चाहिए, जो प्रशिक्षित और उचित उपकरणों से लैस हों।
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आंकड़ों के अनुसार 2022-2024 के बीच कश्मीर घाटी में मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण 36 मौतें, 261 चोटें और 10,303 संघर्ष के मामले दर्ज किए गए हैं। आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार बढ़ते के कारण लोगों को खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
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मानव-वन्यजीव संघर्ष में तेजी आने से ऐसे हादसे हर साल बढ़ रहे हैं। 2022-2023 के दौरान 3,262 घटनाओं की रिपोर्ट आई, जिनमें 15 मौतें और 99 चोटें दर्ज की गई। कश्मीर के उत्तरी हिस्से में इस संकट का सबसे अधिक असर पड़ा, जहां 1,606 घटनाएं और 10 मौतें दर्ज की गईं। दक्षिणी क्षेत्रों शोपियां और जलमग्न क्षेत्रों में 1 से 40 तक चोटों की विभिन्न डिग्रियां देखी गईं।
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2023-2024 में यह स्थिति और बिगड़ी, जहां 4,947 वन्यजीव संघर्ष के मामले दर्ज हुए। इनमें 12 मौतें और 83 लोग घायल हुए। उत्तरी कश्मीर में इस बार भी घटनाओं की संख्या सबसे अधिक रही। इसमें 2,873 मामले और 8 मौतें दर्ज की गईं। दक्षिणी क्षेत्र और शोपियां में चोटों में मामूली कमी आई, लेकिन जलमग्न क्षेत्रों में दो मौतें और एक चोट दर्ज की गई।
दिसंबर 2024 तक इस संकट का हल नहीं निकला है और अब तक 2,094 मामले सामने आए हैं, जिनमें 9 मौतें और 79 लोग घायल हुए।
आलोचकों का कहना है कि वन्यजीव विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण स्थानीय लोग तेंदुए, भालू और अन्य वन्यजीवों से लगातार खतरे में हैं। वरिष्ठ वन्यजीव अधिकारी ने इनमें मानव जनसंख्या का बढ़ना और वन्यजीवों के आवासों में घुसपैठ करना सहित कई प्रमुख कारण बताए।
हाल ही में उत्तरी कश्मीर में घटना में वन्यजीव अधिकारी उस समय घायल हो गए जब उन्होंने एक भालू को लकड़ी से पकड़ने की कोशिश की। भालू ने अधिकारी को काट लिया, लेकिन कुछ स्थानीय लोगों ने हस्तक्षेप किया और लकड़ियों से भालू को खदेड़ा, जिससे वन्यजीव अधिकारियों को अंततः उस जानवर को शांत और पकड़ने का मौका मिला। दक्षिणी कश्मीर के शोपियां में एक और घटना में तेंदुए को शांत किया गया, जब वहां के लोगों ने पत्थर फेंके और शोर मचाया, जिससे चार लोग घायल हो गए। एक अधिकारी ने कहा, कर्मचारियों की क्षमता को बढ़ाना होगा और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों का गठन किया जाना चाहिए, जो प्रशिक्षित और उचित उपकरणों से लैस हों।