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Jammu News: सीमावर्ती क्षेत्रों में मॉक ड्रिल से मौजूदा तनाव के बीच फिर से डर का माहौल
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सलामाबाद (उडी)। सीमावर्ती क्षेत्रों में मॉक ड्रिल की घोषणा के बाद हाल ही में सीमा पार से हुई गोलाबारी से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों में डर की लहर दौड़ गई है। उत्तरी कश्मीर के सीमांत ज़िले बारामुला के उडी सेक्टर के सलामाबाद जैसे क्षेत्रों में लोगों में बेचैनी फैल गई है। यह वो इलाका है जहां 7 मई, 2025 को भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने के बाद हुई भीषण गोलाबारी की यादें अभी भी ताज़ा हैं।
गोलाबारी के पीड़ितों ने बताया कि फिर से हमलों के डर से वे रात भर जागते रहे। एक स्थानीय शम्सुद्दीन निवासी ने कहा, पिछली गोलाबारी के निशान अभी तक ठीक नहीं हुए हैं। और मॉक ड्रिल की ख़बरों से और दहशत फैली हुई है क्योंकि पिछली बार भी मॉक ड्रिल कहा गया था लेकिन उससे पहले ही भारत द्वारा आतंकवादी ठिकानों पर हमला कर दिया गया। निवासी अब भविष्य की घटनाओं से खुद को बचाने के लिए सामुदायिक बंकरों के निर्माण की मांग कर रहे हैं। एक अन्य स्थानीय बशीर अहमद ने कहा कि हम लगातार डर में रहते हैं। बंकरों के बिना, गोलाबारी शुरू होने पर हमारे पास जाने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है।
गौरतलब है कि दहशत फैलने के बाद से कुछ परिवारों ने अपने बच्चे और महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर भी भेजा है। जिनके पास कोई विकल्प नहीं वह वहीँ रुके हुए हैं और खौफ में हैं कि कहीं और कोई हमला न हो जाए और पाकिस्तानी गोलाबारी से उन्हें फिर से प्रभावित होना पड़े।
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गोलाबारी के पीड़ितों ने बताया कि फिर से हमलों के डर से वे रात भर जागते रहे। एक स्थानीय शम्सुद्दीन निवासी ने कहा, पिछली गोलाबारी के निशान अभी तक ठीक नहीं हुए हैं। और मॉक ड्रिल की ख़बरों से और दहशत फैली हुई है क्योंकि पिछली बार भी मॉक ड्रिल कहा गया था लेकिन उससे पहले ही भारत द्वारा आतंकवादी ठिकानों पर हमला कर दिया गया। निवासी अब भविष्य की घटनाओं से खुद को बचाने के लिए सामुदायिक बंकरों के निर्माण की मांग कर रहे हैं। एक अन्य स्थानीय बशीर अहमद ने कहा कि हम लगातार डर में रहते हैं। बंकरों के बिना, गोलाबारी शुरू होने पर हमारे पास जाने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है।
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गौरतलब है कि दहशत फैलने के बाद से कुछ परिवारों ने अपने बच्चे और महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर भी भेजा है। जिनके पास कोई विकल्प नहीं वह वहीँ रुके हुए हैं और खौफ में हैं कि कहीं और कोई हमला न हो जाए और पाकिस्तानी गोलाबारी से उन्हें फिर से प्रभावित होना पड़े।
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