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Jammu News: श्रीनगर में नहर और राष्ट्रीय स्मारक शाह कुल पर अतिक्रमण करने वाले 23 लोगों को नोटिस
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक नहर और राष्ट्रीय स्मारक ''''शाह कुल'''' के 23 कथित अतिक्रमणकारियों को शनिवार को नोटिस जारी किया है। यह नहर मुगल सम्राट जहांगीर के समय से निशात गार्डन को पानी की आपूर्ति का मुख्य स्रोत रही है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति राजेश ओसवाल की खंडपीठ ने इस संबंध में एक आवेदन पर यह निर्देश जारी किया।
सभी 23 व्यक्तियों से तीन सितंबर तक जवाब मांगते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया कि नोटिस डीसी श्रीनगर के माध्यम से दिया जाए।
इस बिंदु पर, सरकारी वकील जहांगीर अहमद डार ने यह सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया को सुगम बनाने का बीड़ा उठाया कि सभी को तीन सितंबर से पहले नोटिस जारी कर दिया जाए। अदालत ने आदेश दिया कि जनहित याचिका में पारित अंतरिम निर्देश, यदि कोई हो, अगली तारीख तक जारी रहेगा। यह जनहित याचिका 2023 में दायर की गई थी। इसमें सभी अवैध अतिक्रमण को हटाने और ऐतिहासिक नहर की मूल स्थिति को बहाल करने के लिए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है। इसमें दो निजी व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण की गई आसपास की सड़कों की बहाली के लिए भी निर्देश देने की मांग की गई है।
जनहित याचिका में आधिकारिक प्रतिवादियों (प्राधिकरणों) के घोर कुप्रबंधन की जांच के लिए एसीबी और अन्य जांच शाखाओं के एक अधिकारी वाली एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने और अधिकारियों के आचरण की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता मोहम्मद शफी ने कश्मीर के संभागीय आयुक्त द्वारा 2004 में भूमि अभिलेख निदेशालय को भेजे गए एक पत्र का भी हवाला दिया है जिसमें कहा गया है कि शाह कौल पर अतिक्रमण कर लिया गया है। जिसके परिणामस्वरूप लाखों रुपये का नुकसान हुआ है क्योंकि निशात गार्डेन के लिए आवश्यक पानी अब यांत्रिक पंपों के माध्यम से उठाया जा रहा है। कश्मीर के आयुक्त ने नहर पर सभी प्रकार के अतिक्रमण को हटाने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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सभी 23 व्यक्तियों से तीन सितंबर तक जवाब मांगते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया कि नोटिस डीसी श्रीनगर के माध्यम से दिया जाए।
इस बिंदु पर, सरकारी वकील जहांगीर अहमद डार ने यह सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया को सुगम बनाने का बीड़ा उठाया कि सभी को तीन सितंबर से पहले नोटिस जारी कर दिया जाए। अदालत ने आदेश दिया कि जनहित याचिका में पारित अंतरिम निर्देश, यदि कोई हो, अगली तारीख तक जारी रहेगा। यह जनहित याचिका 2023 में दायर की गई थी। इसमें सभी अवैध अतिक्रमण को हटाने और ऐतिहासिक नहर की मूल स्थिति को बहाल करने के लिए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है। इसमें दो निजी व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण की गई आसपास की सड़कों की बहाली के लिए भी निर्देश देने की मांग की गई है।
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जनहित याचिका में आधिकारिक प्रतिवादियों (प्राधिकरणों) के घोर कुप्रबंधन की जांच के लिए एसीबी और अन्य जांच शाखाओं के एक अधिकारी वाली एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने और अधिकारियों के आचरण की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता मोहम्मद शफी ने कश्मीर के संभागीय आयुक्त द्वारा 2004 में भूमि अभिलेख निदेशालय को भेजे गए एक पत्र का भी हवाला दिया है जिसमें कहा गया है कि शाह कौल पर अतिक्रमण कर लिया गया है। जिसके परिणामस्वरूप लाखों रुपये का नुकसान हुआ है क्योंकि निशात गार्डेन के लिए आवश्यक पानी अब यांत्रिक पंपों के माध्यम से उठाया जा रहा है। कश्मीर के आयुक्त ने नहर पर सभी प्रकार के अतिक्रमण को हटाने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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