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Jammu News: वक्फ विधेयक पर विपक्षी सांसदों का समर्थन लेने में जुटे मेहदी
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जम्मू। वक्फ (संशोधन) विधेयक पर नेकां सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी विपक्षी सांसदों का समर्थन लेने में जुट गए हैं। उन्होंने नई दिल्ली में हुर्रियत कान्फ्रेंस के प्रमुख व अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक से मुलाकात करके इस मसले पर चर्चा करके उनका समर्थन लिया है। उनका कहना है कि संसद में नंबर सरकार के हक में है। नीतिश कुमार और चंद्र बाबा नायडू के सदस्य बिल को पास करवाने में अहम भूमिका निभाएंगे। लेकिन हम बिल को रोकने के लिए चंद्र बाबा नायडू से आखिरी बार बात करने की कोशिश करेंगे।
सांसद मेहदी ने कहा कि वक्फ का मसला दीन पर अमल की आजादी का मसला है। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 से शुरुआत करके उसके बाद ऐसे कई जबरन बिल लाए गए हैं। देश में मुसलमानों को दूसरे दर्जे के शहरी में तब्दील करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हुर्रियत कान्फ्रेंस के प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक से मुलाकात में उनके द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति (जेपेसी) से मुलाकात में हुई बातचीत और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई है। बिल के पास होने की सूरत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, के सवाल पर मेहदी ने कहा कि अब यह देश के व्यवहार पर निर्भर होगा और क्या यह संविधानिक होगा। भले ही एक बड़ी संख्या सरकार के हक में है, लेकिन हमने अल्पसंख्यकों के हक में सदस्यों, गैर मुसलमान सदस्यों और मुसलमान सदस्यों से बात की है। लेकिन हम लेजिसलेटेड स्तर और संसद के बाहर बिल के खिलाफ अपनी कोशिशें जारी रखेंगे। ऐसे बिल से अल्पसंख्यक मुसलमानों की आजादी को छीनने की कोशिश की जा रही है। इससे देश की आइडोलाजी से दूर किया जा रहा है।
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सांसद मेहदी ने कहा कि वक्फ का मसला दीन पर अमल की आजादी का मसला है। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 से शुरुआत करके उसके बाद ऐसे कई जबरन बिल लाए गए हैं। देश में मुसलमानों को दूसरे दर्जे के शहरी में तब्दील करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हुर्रियत कान्फ्रेंस के प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक से मुलाकात में उनके द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति (जेपेसी) से मुलाकात में हुई बातचीत और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई है। बिल के पास होने की सूरत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, के सवाल पर मेहदी ने कहा कि अब यह देश के व्यवहार पर निर्भर होगा और क्या यह संविधानिक होगा। भले ही एक बड़ी संख्या सरकार के हक में है, लेकिन हमने अल्पसंख्यकों के हक में सदस्यों, गैर मुसलमान सदस्यों और मुसलमान सदस्यों से बात की है। लेकिन हम लेजिसलेटेड स्तर और संसद के बाहर बिल के खिलाफ अपनी कोशिशें जारी रखेंगे। ऐसे बिल से अल्पसंख्यक मुसलमानों की आजादी को छीनने की कोशिश की जा रही है। इससे देश की आइडोलाजी से दूर किया जा रहा है।
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