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नेकां ने वक्फ संशोधन के खिलाफ आवाज नहीं उठाकर निराश किया: इल्तिजा

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श्रीनगर। पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में नेकां सरकार ने वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ आवाज नहीं उठाकर देश के मुसलमानों को निराश किया है।
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उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला को बताना चाहिए कि उनकी पार्टी ने वक्फ विधेयक के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव क्यों नहीं लाई, जबकि जम्मू-कश्मीर भारत का एकमात्र मुस्लिम बहुल राज्य है। सिर्फ जम्मू-कश्मीर के मुसलमान ही हमारी ओर नहीं देख रहे हैं, बल्कि देश के बाकी हिस्सों के मुसलमान भी हमारी ओर देख रहे हैं। नेकां ने उन्हें बुरी तरह निराश किया है।
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इल्तिजा नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी का जवाब दे रही थीं, जिन्होंने सोमवार को पीडीपी पर औकाफ को राज्य वक्फ बोर्ड में बदलने का आरोप लगाया था।
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उन्होंने कहा, आप मुसलमानों के बारे में बात नहीं करना चाहते हैं। आप 370 (निरस्त करने को) को सामान्य बना रहे हैं। उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि वक्फ मुस्लिम विरोधी है, इसे मुसलमानों को कमजोर करने के लिए लाया गया है। नेकां इसके बारे में बात भी नहीं करना चाहती क्योंकि यह सत्ता की भूखी है। वे सत्ता और कुर्सी चाहते हैं।
औकाफ के बारे में नेकां अध्यक्ष की टिप्पणी पर मुफ्ती ने कहा कि यह नेकां का सबसे बड़ा प्रचार है। इससे पहले, नेकां नीलाम की गई औकाफ संपत्तियों को अपने लोगों को दे देती थी। उनके बेटे (उमर अब्दुल्ला) 50 विधायकों के साथ सीएम हैं। कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु ने वक्फ के खिलाफ प्रस्ताव लाने का फैसला किया, हमारे सीएम क्या कर रहे थे। हाल ही में संपन्न सत्र के आखिरी तीन दिनों में विधानसभा में हुए हंगामे का जिक्र करते हुए मुफ्ती ने कहा कि सरकार वक्फ के खिलाफ प्रस्ताव नहीं लाई क्योंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस का भाजपा के साथ समझौता है। उन्होंने कहा, वह (उमर) ट्यूलिप गार्डन में (केंद्रीय मंत्री किरेन) रिजिजू के साथ घूम रहे थे। उनका भाजपा के साथ पहले से ही समझौता है कि वे न तो वक्फ के बारे में बात करेंगे और न ही इसके खिलाफ कोई प्रस्ताव लाएंगे।

उन्होंने कहा कि अगर नेकां विधायक स्पीकर से नाराज थे तो उन्हें उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहिए था। इल्तिजा ने कहा, यह एक मौन समझौता है। नेकां विधायकों ने वक्फ के बारे में बात नहीं की, यह केवल हमारे विधायक थे जिन्होंने किया। नेका उन मुद्दों पर भी बात नहीं कर रही है, जिन पर भाजपा चुप है। क्योंकि उनके पास एक मौन सहमति है।
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