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Jammu News: कश्मीर में पूर्व आतंकियों पर फिर सुरक्षाबलों की कड़ी नजर
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श्रीनगर। कश्मीर घाटी में हाल ही में उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा और बारामुला समेत कुपवाड़ा जिले में सरेंडर या पूर्व आतंकी एक बार फिर सुरक्षाबलों के रडार पर हैं। दरअसल उत्तरी कश्मीर में हाल ही में ऐसी आतंकवादी गतिविधियां देखी गईं, जिनमें सरेंडर या पूर्व आतंकी या उनके परिजन शामिल पाए गए। इसके बाद एक बार फिर ऐसे सरेंडर या सजा काट चुके पूर्व आतंकवादी सुरक्षाबलों के रडार पर आ गए हैं। खासकर 26 जनवरी से पूर्व की बात करें तो ऐसे सभी व्यक्तियों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।
इस वर्ष 7 जनवरी को बारामुला के पट्टन में सेना के शिविर में स्थित एमआई रूम पर एक ग्रेनेड हमला हुआ। इसकी जांच के दौरान सुरक्षाबलों ने 3 ऐसे आतंकवादी सहायकों को गिरफ्तार किया, जिसमें एक सरेंडर आतंकवादी और दूसरा एक पूर्व आतंकी का बेटा शामिल था। इनके पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद किया गया था।
वहीं 15 जनवरी को बारामुला में ही एक नाके पर तलाशी अभियान के दौरान एक आतंकवादी मददगार से एके 47, 3 मैगजीन, 256 कारतूस बरामद किए थे। जांच में पता चला कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति पूर्व आतंकी रहा है।
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बारामुला जिले के एएसपी फिरोज याह्या के अनुसार, किसी भी आतंकी घटना में सरेंडर या पूर्व आतंकवादी के परिवार के सदस्य का शामिल होना मुख्य धारा में शामिल होने में बाधा बनता है। पुलिस की हमेशा कोशिश है कि वह ऐसे परिवारों के साथ भरोसे का रिश्ता बनाए।
जानकारों के अनुसार बीते वर्ष में कश्मीर से आतंकवादी संगठनों में स्थानीय युवाओं के शामिल होने का आंकड़ा महज 7 है, जो अभी तक का सबसे कम है। इनमें श्रीनगर से कोई भी नहीं हैं।
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इस वर्ष 7 जनवरी को बारामुला के पट्टन में सेना के शिविर में स्थित एमआई रूम पर एक ग्रेनेड हमला हुआ। इसकी जांच के दौरान सुरक्षाबलों ने 3 ऐसे आतंकवादी सहायकों को गिरफ्तार किया, जिसमें एक सरेंडर आतंकवादी और दूसरा एक पूर्व आतंकी का बेटा शामिल था। इनके पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद किया गया था।
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वहीं 15 जनवरी को बारामुला में ही एक नाके पर तलाशी अभियान के दौरान एक आतंकवादी मददगार से एके 47, 3 मैगजीन, 256 कारतूस बरामद किए थे। जांच में पता चला कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति पूर्व आतंकी रहा है।
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बारामुला जिले के एएसपी फिरोज याह्या के अनुसार, किसी भी आतंकी घटना में सरेंडर या पूर्व आतंकवादी के परिवार के सदस्य का शामिल होना मुख्य धारा में शामिल होने में बाधा बनता है। पुलिस की हमेशा कोशिश है कि वह ऐसे परिवारों के साथ भरोसे का रिश्ता बनाए।
जानकारों के अनुसार बीते वर्ष में कश्मीर से आतंकवादी संगठनों में स्थानीय युवाओं के शामिल होने का आंकड़ा महज 7 है, जो अभी तक का सबसे कम है। इनमें श्रीनगर से कोई भी नहीं हैं।