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क्षेत्रीय शांति के लिए कश्मीर मुद्दे का समाधान जरूरी: महबूबा
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श्रीनगर। पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि क्षेत्रीय शांति के लिए कश्मीर मुद्दे का समाधान जरूरी है।
उन्होंने सोमवार को निगीन में मीरवाइज मंजिल का दौरा किया और मीरवाइज यूसुफ शाह के बेटे मीरवाइज मौलवी मुहम्मद अहमद शाह के निधन पर शोक जताया। महबूबा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) से अलग हुए परिवारों को एक साथ शोक मनाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि मीरवाइज परिवार को इस दुख की घड़ी में एकजुट होने की अनुमति दी जानी चाहिए थी।
मीरवाइज मंजिल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए महबूबा ने कहा, मौलवी अहमद शाह के निधन की खबर सुनकर दिल टूट गया है और इससे भी ज्यादा दुखद यह है कि मीरवाइज उमर को अंतिम संस्कार में शामिल होने से रोका गया।
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मैं यह समझने में विफल हूं कि यह सरकार ऐसे कदम क्यों उठाती है, जो केवल कश्मीर के लोगों को याद दिलाते हैं कि वे एक लोकतांत्रिक राष्ट्र का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि दमन के अधीन हैं।
महबूबा ने पीडीपी के संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद के दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला। कहा कि मुफ्ती साहब का मानना था कि हमें विभाजित करने वाली दीवारें गिरा देनी चाहिए, ताकि दोनों पक्षों के लोग जुड़ सकें और कश्मीर मुद्दे के सम्मानजनक समाधान को बढ़ावा दे सकें।
श्रीनगर में मीरवाइज को नमाज पढ़ने की भी इजाजत न दिए जाने पर उन्होंने कहा, यह स्थिति कश्मीर की दर्दनाक कहानी और इतिहास को बयां करती है। कश्मीर मुद्दे को सुलझाए बिना, इन घावों को भरे बिना केंद्र सरकार के पास शांति और सुलह सुनिश्चित करने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
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उन्होंने सोमवार को निगीन में मीरवाइज मंजिल का दौरा किया और मीरवाइज यूसुफ शाह के बेटे मीरवाइज मौलवी मुहम्मद अहमद शाह के निधन पर शोक जताया। महबूबा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) से अलग हुए परिवारों को एक साथ शोक मनाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि मीरवाइज परिवार को इस दुख की घड़ी में एकजुट होने की अनुमति दी जानी चाहिए थी।
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मीरवाइज मंजिल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए महबूबा ने कहा, मौलवी अहमद शाह के निधन की खबर सुनकर दिल टूट गया है और इससे भी ज्यादा दुखद यह है कि मीरवाइज उमर को अंतिम संस्कार में शामिल होने से रोका गया।
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मैं यह समझने में विफल हूं कि यह सरकार ऐसे कदम क्यों उठाती है, जो केवल कश्मीर के लोगों को याद दिलाते हैं कि वे एक लोकतांत्रिक राष्ट्र का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि दमन के अधीन हैं।
महबूबा ने पीडीपी के संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद के दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला। कहा कि मुफ्ती साहब का मानना था कि हमें विभाजित करने वाली दीवारें गिरा देनी चाहिए, ताकि दोनों पक्षों के लोग जुड़ सकें और कश्मीर मुद्दे के सम्मानजनक समाधान को बढ़ावा दे सकें।
श्रीनगर में मीरवाइज को नमाज पढ़ने की भी इजाजत न दिए जाने पर उन्होंने कहा, यह स्थिति कश्मीर की दर्दनाक कहानी और इतिहास को बयां करती है। कश्मीर मुद्दे को सुलझाए बिना, इन घावों को भरे बिना केंद्र सरकार के पास शांति और सुलह सुनिश्चित करने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है।