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भारत के लोगों के बीच एक वैचारिक क्रांति की आवश्यकता : कुलश्रेष्ठ
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परगवाल में ज्योति प्रचलित करते पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठसंवाद
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परगवाल। सीमावर्ती क्षेत्र में बाबा परगो सेवा दल, शिवा फाउंडेशन ट्रस्ट और हिंदू राष्ट्र मंच की ओर से सेमिनार का आयोजन किया गया। परगो मेमोरियल शिक्षा केंद्र स्कूल में आयोजित इस सेमिनार में प्रसिद्ध राष्ट्रीय वक्ता और विचारक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा, भारत के लोगों के बीच एक वैचारिक क्रांति की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आज भी हम अंग्रेजों द्वारा बनाए गए नियमों और उनके द्वारा फैलाए गए नैरेटिव पर ही अपना विश्वास बनाए हुए हैं। हम आज भी उस इतिहास पर यकीन करते हैं जिसे तथाकथित वामपंथियों ने लिखा था, जिन्होंने बस वही लिखा जो उन्हें अच्छा लगा। हालांकि अब हमें एक नए इतिहास का अध्ययन करने की आवश्यकता है, जिसे जान-बूझकर हमसे छिपाया गया था।
सेमिनार के दौरान “देश और सनातन धर्म के प्रति जागरूकता” तथा “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने जोर देकर कहा कि इस देश में रहने वाले प्रत्येक भारतीय नागरिक को और विशेष रूप से प्रत्येक सनातनी को अपने स्वयं के इतिहास की पूरी समझ होनी चाहिए। अधूरा या आंशिक ज्ञान हानिकारक हो सकता है। उन्होंने आगे यह भी बताया कि जब संसद में वक्फ बिल पर बहस होनी थी तो यह हमारे अपने लोग ही थे जो इसके खिलाफ खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि आज भारत में सबसे ज़्यादा ज़मीन रेलवे के पास है, दूसरे नंबर पर डिफेंस है और ज़मीन के मालिकाना हक के मामले में तीसरे नंबर पर वक्फ बोर्ड है। इसके बिल्कुल उलट हम इस ज़मीन के मूल निवासियों के पास कुल ज़मीन का सिर्फ़ पांचवां हिस्सा है।
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उन्होंने कहा कि एक सनातनी के तौर पर हमें एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए क्योंकि जहां सीमाओं पर लड़ाई हमारी सेनाएं लड़ रही हैं, वहीं अपने ही देश के भीतर की लड़ाई हमें खुद लड़नी होगी।
उन्होंने किसी भी सभा, बैठक या सरकारी मीटिंग से पहले ''''पूर्ण वंदे मातरम'''' के उच्चारण पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने भारत के सनातनी लोगों के बीच जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर एकता बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग एक करोड़ से भी ज़्यादा लोग/घुसपैठिए रह रहे हैं, जो हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए सीधा खतरा है।
टीम पुष्पेंद्र के संयोजक विशाल गुप्ता ने मंदिरों की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए पी. कुलश्रेष्ठ के ''''हनुमान चालीसा अभियान'''' पर प्रकाश डाला। आंतरिक राष्ट्र-विरोधी खतरों के संबंध में बिपिन रावत के विचारों का उल्लेख करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ज़िम्मेदार उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने अनुच्छेद 370 के बारे में जागरूकता बढ़ाने, सरकारी संस्थानों में ''''वंदे मातरम'''' को बढ़ावा देने, वक्फ बोर्ड में सुधार, संसद में वीर सावरकर की तस्वीर लगाने और एंग्लो-इंडियन के लिए आरक्षित सीटों को हटाने जैसे विषयों पर बात की। इस मौके पर युवा राजपूत सभा के प्रधान मनदीप सिंह, ऑल इंडिया भाऊ बिरादरी के प्रधान नरेंद्र सिंह, संत रामनाथ, लाल सिंह, समेत बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा कि आज भी हम अंग्रेजों द्वारा बनाए गए नियमों और उनके द्वारा फैलाए गए नैरेटिव पर ही अपना विश्वास बनाए हुए हैं। हम आज भी उस इतिहास पर यकीन करते हैं जिसे तथाकथित वामपंथियों ने लिखा था, जिन्होंने बस वही लिखा जो उन्हें अच्छा लगा। हालांकि अब हमें एक नए इतिहास का अध्ययन करने की आवश्यकता है, जिसे जान-बूझकर हमसे छिपाया गया था।
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सेमिनार के दौरान “देश और सनातन धर्म के प्रति जागरूकता” तथा “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने जोर देकर कहा कि इस देश में रहने वाले प्रत्येक भारतीय नागरिक को और विशेष रूप से प्रत्येक सनातनी को अपने स्वयं के इतिहास की पूरी समझ होनी चाहिए। अधूरा या आंशिक ज्ञान हानिकारक हो सकता है। उन्होंने आगे यह भी बताया कि जब संसद में वक्फ बिल पर बहस होनी थी तो यह हमारे अपने लोग ही थे जो इसके खिलाफ खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि आज भारत में सबसे ज़्यादा ज़मीन रेलवे के पास है, दूसरे नंबर पर डिफेंस है और ज़मीन के मालिकाना हक के मामले में तीसरे नंबर पर वक्फ बोर्ड है। इसके बिल्कुल उलट हम इस ज़मीन के मूल निवासियों के पास कुल ज़मीन का सिर्फ़ पांचवां हिस्सा है।
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उन्होंने कहा कि एक सनातनी के तौर पर हमें एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए क्योंकि जहां सीमाओं पर लड़ाई हमारी सेनाएं लड़ रही हैं, वहीं अपने ही देश के भीतर की लड़ाई हमें खुद लड़नी होगी।
उन्होंने किसी भी सभा, बैठक या सरकारी मीटिंग से पहले ''''पूर्ण वंदे मातरम'''' के उच्चारण पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने भारत के सनातनी लोगों के बीच जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर एकता बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग एक करोड़ से भी ज़्यादा लोग/घुसपैठिए रह रहे हैं, जो हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए सीधा खतरा है।
टीम पुष्पेंद्र के संयोजक विशाल गुप्ता ने मंदिरों की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए पी. कुलश्रेष्ठ के ''''हनुमान चालीसा अभियान'''' पर प्रकाश डाला। आंतरिक राष्ट्र-विरोधी खतरों के संबंध में बिपिन रावत के विचारों का उल्लेख करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ज़िम्मेदार उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने अनुच्छेद 370 के बारे में जागरूकता बढ़ाने, सरकारी संस्थानों में ''''वंदे मातरम'''' को बढ़ावा देने, वक्फ बोर्ड में सुधार, संसद में वीर सावरकर की तस्वीर लगाने और एंग्लो-इंडियन के लिए आरक्षित सीटों को हटाने जैसे विषयों पर बात की। इस मौके पर युवा राजपूत सभा के प्रधान मनदीप सिंह, ऑल इंडिया भाऊ बिरादरी के प्रधान नरेंद्र सिंह, संत रामनाथ, लाल सिंह, समेत बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित थे।