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Jammu News: 15 साल पुराने हत्या मामले में दो आरोपी बरी
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सांबा। प्रधान सत्र न्यायालय ने वर्ष 2011 के बहुचर्चित नगर सिंह हत्याकांड में आरोपी रमन कुमार उर्फ मिट्ठू और एक अन्य महिला को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या के आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।
मामला थाना घगवाल में वर्ष 2011 से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार 18 फरवरी 2011 को नगर सिंह का शव टपयाल नाले में मिला था। पुलिस ने दावा किया था कि आरोपी रमन कुमार और महिला के बीच कथित अवैध संबंध थे और मृतक को इसकी जानकारी होने के कारण उसकी हत्या की गई। पुलिस ने हत्या में हथियारों के इस्तेमाल तथा मोबाइल कॉल डिटेल्स, खून से सने कपड़े और बालों के नमूनों को अहम साक्ष्य बताया था।
हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष कथित अवैध संबंध, हत्या की साजिश, कॉल डिटेल्स, हथियारों की बरामदगी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को कानूनी रूप से साबित नहीं कर सका। कई गवाह अपने पुराने बयानों से मुकर गए, जबकि एफएसएल रिपोर्ट और सिम कार्ड संबंधी साक्ष्यों में भी विरोधाभास पाए गए।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन के साक्ष्य विरोधाभास और विसंगतियों से भरे हुए हैं तथा केवल शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को आरपीसी और आर्म्स एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया गया।
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मामला थाना घगवाल में वर्ष 2011 से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार 18 फरवरी 2011 को नगर सिंह का शव टपयाल नाले में मिला था। पुलिस ने दावा किया था कि आरोपी रमन कुमार और महिला के बीच कथित अवैध संबंध थे और मृतक को इसकी जानकारी होने के कारण उसकी हत्या की गई। पुलिस ने हत्या में हथियारों के इस्तेमाल तथा मोबाइल कॉल डिटेल्स, खून से सने कपड़े और बालों के नमूनों को अहम साक्ष्य बताया था।
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हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष कथित अवैध संबंध, हत्या की साजिश, कॉल डिटेल्स, हथियारों की बरामदगी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को कानूनी रूप से साबित नहीं कर सका। कई गवाह अपने पुराने बयानों से मुकर गए, जबकि एफएसएल रिपोर्ट और सिम कार्ड संबंधी साक्ष्यों में भी विरोधाभास पाए गए।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन के साक्ष्य विरोधाभास और विसंगतियों से भरे हुए हैं तथा केवल शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को आरपीसी और आर्म्स एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया गया।