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Jammu News: एनडीपीएस मामले में महिला आरोपी की जमानत याचिका खारिज
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सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायालय सांबा ने एनडीपीएस एक्ट से जुड़े एक मामले में महिला आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी हुई है और आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
जमानत याचिका में आरोपी ने दलील दी थी कि वह एक महिला है और उसके साथ एक नाबालिग बच्चा भी जेल में रह रहा है। बच्चे के पिता (आरोपी के पति) का निधन हो चुका है। इसके चलते उसकी देखभाल करने वाला कोई अन्य परिजन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बच्चे को मजबूरीवश मां के साथ जेल में रखना पड़ रहा है।
हालांकि, अदालत ने इस मानवीय आधार को स्वीकार करते हुए भी कहा कि मामले की गंभीरता और एनडीपीएस एक्ट के कड़े प्रावधानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने पाया कि आरोपी का पहले भी एक अन्य एनडीपीएस मामले में नाम सामने आ चुका है और जमानत के दौरान दोबारा ऐसे मामले में शामिल होना गंभीर उल्लंघन है।
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अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जांच के दौरान आरोपी का बयान दर्ज किया गया है। इसमें उसने अपनी भूमिका को स्वीकार किया है और बैंक लेन-देन से जुड़े नए तथ्य भी सामने आए हैं। इसके चलते मामला और अधिक गंभीर हो जाता है।
न्यायालय ने कहा कि धारा 37 के तहत जमानत देने के लिए आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होतीं। इसलिए सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
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जमानत याचिका में आरोपी ने दलील दी थी कि वह एक महिला है और उसके साथ एक नाबालिग बच्चा भी जेल में रह रहा है। बच्चे के पिता (आरोपी के पति) का निधन हो चुका है। इसके चलते उसकी देखभाल करने वाला कोई अन्य परिजन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बच्चे को मजबूरीवश मां के साथ जेल में रखना पड़ रहा है।
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हालांकि, अदालत ने इस मानवीय आधार को स्वीकार करते हुए भी कहा कि मामले की गंभीरता और एनडीपीएस एक्ट के कड़े प्रावधानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने पाया कि आरोपी का पहले भी एक अन्य एनडीपीएस मामले में नाम सामने आ चुका है और जमानत के दौरान दोबारा ऐसे मामले में शामिल होना गंभीर उल्लंघन है।
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अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जांच के दौरान आरोपी का बयान दर्ज किया गया है। इसमें उसने अपनी भूमिका को स्वीकार किया है और बैंक लेन-देन से जुड़े नए तथ्य भी सामने आए हैं। इसके चलते मामला और अधिक गंभीर हो जाता है।
न्यायालय ने कहा कि धारा 37 के तहत जमानत देने के लिए आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होतीं। इसलिए सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी गई।