{"_id":"69ced4c3e5dec3376204ebd2","slug":"jammu-kashmir-news-samba-news-c-289-1-sba1003-111676-2026-04-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: झूठे मेडिकल पर जमानत की कोशिश नाकाम, कोर्ट ने जमानत अर्जी ठुकराई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: झूठे मेडिकल पर जमानत की कोशिश नाकाम, कोर्ट ने जमानत अर्जी ठुकराई
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा की अदालत ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की तरफ से दर्ज एक मामले में आरोपी की अंतरिम मेडिकल जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि आरोपी मोहम्मद हनीफ बिजरान निवासी कंगन, जिला गांदरबल की तरफ से बीमारी के दावे के समर्थन में पेश किए गए आधार न केवल भ्रामक थे, बल्कि पहले के रिकॉर्ड के अनुसार फर्जी भी पाए गए थे।
आरोपी ने पित्त की पथरी (गाल ब्लैडर स्टोन) के इलाज के लिए तीन महीने की जमानत मांगी थी। हालांकि, अदालत के आदेश पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू और जीएमसी जम्मू में कराए गए नए अल्ट्रासाउंड परीक्षणों में किसी भी पथरी की पुष्टि नहीं हुई। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी ने पूर्व में उच्च न्यायालय से जो अंतरिम जमानत ली थी, उसके लिए इस्तेमाल किए गए मेडिकल दस्तावेज भी एसएचएमएस अस्पताल श्रीनगर द्वारा जांच के दौरान फर्जी पाए गए थे।
इस मामले में अदालत ने जिला जेल जम्मू के अधीक्षक के खिलाफ देरी के कारण शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई (वेतन रोकने का आदेश) को भी वापस ले लिया है, क्योंकि देरी का कारण उचित पाया गया। अदालत ने माना कि रिपोर्ट प्रस्तुत करने में हुई देरी जानबूझकर नहीं थी। कोर्ट ने आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
आरोपी ने पित्त की पथरी (गाल ब्लैडर स्टोन) के इलाज के लिए तीन महीने की जमानत मांगी थी। हालांकि, अदालत के आदेश पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू और जीएमसी जम्मू में कराए गए नए अल्ट्रासाउंड परीक्षणों में किसी भी पथरी की पुष्टि नहीं हुई। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी ने पूर्व में उच्च न्यायालय से जो अंतरिम जमानत ली थी, उसके लिए इस्तेमाल किए गए मेडिकल दस्तावेज भी एसएचएमएस अस्पताल श्रीनगर द्वारा जांच के दौरान फर्जी पाए गए थे।
विज्ञापन
इस मामले में अदालत ने जिला जेल जम्मू के अधीक्षक के खिलाफ देरी के कारण शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई (वेतन रोकने का आदेश) को भी वापस ले लिया है, क्योंकि देरी का कारण उचित पाया गया। अदालत ने माना कि रिपोर्ट प्रस्तुत करने में हुई देरी जानबूझकर नहीं थी। कोर्ट ने आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।
विज्ञापन