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फारूक- उमर से आज मिलेंगे राणा, दे सकते हैं इस्तीफा
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जम्मू। नेकां के संभागीय प्रधान देवेंद्र सिंह राणा के लिए बुधवार का दिन पार्टी में आखिरी दिन हो सकता है। उनका बुधवार सुबह श्रीनगर में पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला व उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला से मिलने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि मुलाकात के दौरान ही वे पार्टी की प्राथमिक सदस्यता तथा संभागीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
सूत्रों ने बताया कि सोमवार की देर शाम वे दिल्ली चले गए थे। मंगलवार को उन्होंने कुछ केंद्रीय नेताओं से मुलाकात की और शाम को ही जम्मू लौट आए। इस बीच बुधवार को उनके श्रीनगर में नेकां अध्यक्ष व उपाध्यक्ष से मिलने तथा नवरात्र के पहले दिन मां वैष्णो देवी के दरबार में हाजिरी लगाने का कार्यक्रम बताया जा रहा है। बताते हैं कि राणा के पार्टी छोड़ने की चर्चाओं के बीच फारूक ने जम्मू आकर मिलने को कहा था, लेकिन उन्होंने व्यस्तताओं के चलते श्रीनगर पहुंचकर मिलने की बात कही थी। इस बीच सूत्रों ने बताया कि अगले कुछ दिनों में वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि पार्टी के कश्मीर संभाग के अध्यक्ष नासिर असलम वानी का कहना है कि राणा के पार्टी से किसी तरह के इस्तीफे की कोई बात सामने नहीं आई है। डॉ. फारूक और उमर से मुलाकात के कार्यक्रम की भी कोई जानकारी नहीं है।
नेकां को झटका, भाजपा को हो सकता है फायदा
राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि यदि देवेंद्र सिंह राणा ने नेकां छोड़ी तो यह पार्टी के लिए झटका होगा। साथ ही अगर वह भाजपा का दामन थामते हैं तो आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी और मजबूत होगी। यही कारण है कि भाजपा के आम कार्यकर्ताओं में उत्साह दिख रहा है। आम कार्यकर्ताओं का मानना है कि गुपकार गठबंधन घोषणा पत्र के समानांतर जम्मू घोषणा जारी कर उन्होंने कश्मीरी नेताओं को सीधी चुनौती दी, जो हमेशा से प्रदेश की राजनीति में हावी रहे। नगरोटा विधानसभा क्षेत्र के अलावा अन्य कई जिलों में भी जम्मू घोषणा का एलान करके राणा ने जनाधार जुटाया है। दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली सर्वदलीय बैठक हो या फिर पीएजीडी की बैठक उन्होंने पार्टी के केंद्रीय नेताओं के सामने साफ तौर पर जम्मू के हितों की बात करने की वकालत की। यही कारण है कि वह संघ के नेताओं की भी पसंद बताए जा रहे हैं। हालांकि भाजपा के कुछ नेताओं को यह नागवार लग रहा है।
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सूत्रों ने बताया कि सोमवार की देर शाम वे दिल्ली चले गए थे। मंगलवार को उन्होंने कुछ केंद्रीय नेताओं से मुलाकात की और शाम को ही जम्मू लौट आए। इस बीच बुधवार को उनके श्रीनगर में नेकां अध्यक्ष व उपाध्यक्ष से मिलने तथा नवरात्र के पहले दिन मां वैष्णो देवी के दरबार में हाजिरी लगाने का कार्यक्रम बताया जा रहा है। बताते हैं कि राणा के पार्टी छोड़ने की चर्चाओं के बीच फारूक ने जम्मू आकर मिलने को कहा था, लेकिन उन्होंने व्यस्तताओं के चलते श्रीनगर पहुंचकर मिलने की बात कही थी। इस बीच सूत्रों ने बताया कि अगले कुछ दिनों में वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि पार्टी के कश्मीर संभाग के अध्यक्ष नासिर असलम वानी का कहना है कि राणा के पार्टी से किसी तरह के इस्तीफे की कोई बात सामने नहीं आई है। डॉ. फारूक और उमर से मुलाकात के कार्यक्रम की भी कोई जानकारी नहीं है।
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नेकां को झटका, भाजपा को हो सकता है फायदा
राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि यदि देवेंद्र सिंह राणा ने नेकां छोड़ी तो यह पार्टी के लिए झटका होगा। साथ ही अगर वह भाजपा का दामन थामते हैं तो आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी और मजबूत होगी। यही कारण है कि भाजपा के आम कार्यकर्ताओं में उत्साह दिख रहा है। आम कार्यकर्ताओं का मानना है कि गुपकार गठबंधन घोषणा पत्र के समानांतर जम्मू घोषणा जारी कर उन्होंने कश्मीरी नेताओं को सीधी चुनौती दी, जो हमेशा से प्रदेश की राजनीति में हावी रहे। नगरोटा विधानसभा क्षेत्र के अलावा अन्य कई जिलों में भी जम्मू घोषणा का एलान करके राणा ने जनाधार जुटाया है। दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली सर्वदलीय बैठक हो या फिर पीएजीडी की बैठक उन्होंने पार्टी के केंद्रीय नेताओं के सामने साफ तौर पर जम्मू के हितों की बात करने की वकालत की। यही कारण है कि वह संघ के नेताओं की भी पसंद बताए जा रहे हैं। हालांकि भाजपा के कुछ नेताओं को यह नागवार लग रहा है।
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