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बाल विवाह के खिलाफ सामूहिक जिम्मेदारी और सामुदायिक सर्तकता जरूरी : डीसी
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रियासी। समाज कल्याण विभाग ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम बाल विवाह मुक्त भारत विषय पर आधारित था। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता करना और निवारक कार्रवाई को मजबूत करना था।
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं आशा कार्यकर्ताओं, मातृ एवं बाल्यावस्था नर्सों और पुलिस कर्मियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम में अभियान के उद्देश्यों से अवगत कराना और बाल विवाह से बच्चों की सुरक्षा में उनकी भूमिका को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला उपायुक्त निधि मलिक ने किया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई और बाल अधिकारों का घोर उल्लंघन है, जो बच्चों विशेषकर लड़कियों के शारीरिक मानसिक और शैक्षिक विकास को बुरी तरह प्रभावित करता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बाल विवाह उन्मूलन के लिए सामूहिक जिम्मेदारी मजबूत सामुदायिक सतर्कता और प्रभावी अंतर विभागीय समन्वय आवश्यक है।
अग्रणी कार्यकर्ताओं और पुलिस कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उपायुक्त ने बाल विवाह को होने से पहले ही रोकने के लिए शीघ्र पहचान, समय पर रिपोर्टिंग और जमीनी स्तर पर समन्वित निवारक कार्रवाई के महत्व पर बल दिया। उन्होंने सभी हितधारकों से सामाजिक परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, स्वस्थ और गरिमापूर्ण बचपन का आनंद ले।
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कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ जिसमें प्रतिभागियों ने अपने जमीनी अनुभव साझा किए और बाल विवाह की रोकथाम के लिए सामुदायिक स्तर पर सक्रिय रूप से काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। कार्यक्रम में जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी सचिन शर्मा, जिला अस्पताल स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ऊर्जा जुत्शी, जिला अस्पताल की अभियोजन अधिकारी शिखा जमवाल और अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।
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कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं आशा कार्यकर्ताओं, मातृ एवं बाल्यावस्था नर्सों और पुलिस कर्मियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम में अभियान के उद्देश्यों से अवगत कराना और बाल विवाह से बच्चों की सुरक्षा में उनकी भूमिका को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला उपायुक्त निधि मलिक ने किया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई और बाल अधिकारों का घोर उल्लंघन है, जो बच्चों विशेषकर लड़कियों के शारीरिक मानसिक और शैक्षिक विकास को बुरी तरह प्रभावित करता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बाल विवाह उन्मूलन के लिए सामूहिक जिम्मेदारी मजबूत सामुदायिक सतर्कता और प्रभावी अंतर विभागीय समन्वय आवश्यक है।
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अग्रणी कार्यकर्ताओं और पुलिस कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उपायुक्त ने बाल विवाह को होने से पहले ही रोकने के लिए शीघ्र पहचान, समय पर रिपोर्टिंग और जमीनी स्तर पर समन्वित निवारक कार्रवाई के महत्व पर बल दिया। उन्होंने सभी हितधारकों से सामाजिक परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, स्वस्थ और गरिमापूर्ण बचपन का आनंद ले।
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कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ जिसमें प्रतिभागियों ने अपने जमीनी अनुभव साझा किए और बाल विवाह की रोकथाम के लिए सामुदायिक स्तर पर सक्रिय रूप से काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। कार्यक्रम में जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी सचिन शर्मा, जिला अस्पताल स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ऊर्जा जुत्शी, जिला अस्पताल की अभियोजन अधिकारी शिखा जमवाल और अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।