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एलओसी से सटे क्षेत्रों से बारूदी सुरंगें हटाई जाएं : राणा
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नई दिल्ली,जम्मू। नियंत्रण रेखा पर बाड़ लगाने, आसपास के इलाकों में बारूदी सुरंगों से जनजातीय समुदाय पर असर पड़ रहा है। जरूरी है कि गुज्जर बकरवाल समुदाय को मुख्य धारा से जोड़ा जाए और नियंत्रण रेखा पर बाड़ लगाने वाले गांवों से आने-जाने वाले आपातकालीन आवागमन को कम किया जाए। यह मांग और चिंता जम्मू-कश्मीर के कैबिनेट मंत्री जावेद राणा ने सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी के समक्ष रखीं।
जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण तथा जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद राणा नई दिल्ली में वीरवार को सेना प्रमुख (सीओएएस) जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मिले।
मंत्री ने बताया कि नियंत्रण रेखा पर बाड़ लगाने से जनजातीय आजीविका, विशेष रूप से गुज्जर-बकरवाल समुदाय पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने पर चर्चा की गई। चर्चा का उद्देश्य उनके दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना था, विशेष रूप से नियंत्रण रेखा पर बाड़ लगाने वाले गांवों से आने-जाने वाले आपातकालीन आवागमन को कम करना।
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गुज्जर-बकरवाल निर्बाध आवाजाही तथा आजीविका गतिविधियों को सुगम बनाने के उद्देश्य से, राणा ने पारंपरिक प्रवास मार्गों तथा चरागाह भूमि तक पहुंच पर प्रतिबंधों को कम करने पर जोर दिया। मंत्री ने ये भी बताया कि कनेक्टिविटी में सुधार तथा लोगों की आवाजाही को आसान बनाने पर भी गहन चर्चा की गई। नियंत्रण रेखा और पीर पंजाल क्षेत्र के इलाकों में बीआरओ की सभी सड़कों के रखरखाव और उन्नयन पर भी चर्चा की गई। बैठक में जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता बनाए रखने में गुज्जर-बकरवाल और अन्य जनजातियों की भूमिका को मुख्यधारा में लाने के महत्व पर जोर दिया गया।
गुज्जर युवाओं को प्रादेशिक सेना में भर्ती के लिए चलाएं अभियान
मंत्री ने जम्मू-कश्मीर के दूर-दराज के जिलों में भर्ती अभियान/शिविर लगाने और गुज्जर युवाओं को प्रादेशिक सेना में भर्ती करने के लिए गुज्जर रेजिमेंट की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा। क्षेत्र में समान विकास को बढ़ावा देने के लिए राणा ने सागरा गांव में एक खेल स्टेडियम और मेंढर के धना शास्त्री में हेलीपैड के निर्माण में सहयोग का भी प्रस्ताव रखा।
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जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण तथा जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद राणा नई दिल्ली में वीरवार को सेना प्रमुख (सीओएएस) जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मिले।
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मंत्री ने बताया कि नियंत्रण रेखा पर बाड़ लगाने से जनजातीय आजीविका, विशेष रूप से गुज्जर-बकरवाल समुदाय पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने पर चर्चा की गई। चर्चा का उद्देश्य उनके दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना था, विशेष रूप से नियंत्रण रेखा पर बाड़ लगाने वाले गांवों से आने-जाने वाले आपातकालीन आवागमन को कम करना।
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गुज्जर-बकरवाल निर्बाध आवाजाही तथा आजीविका गतिविधियों को सुगम बनाने के उद्देश्य से, राणा ने पारंपरिक प्रवास मार्गों तथा चरागाह भूमि तक पहुंच पर प्रतिबंधों को कम करने पर जोर दिया। मंत्री ने ये भी बताया कि कनेक्टिविटी में सुधार तथा लोगों की आवाजाही को आसान बनाने पर भी गहन चर्चा की गई। नियंत्रण रेखा और पीर पंजाल क्षेत्र के इलाकों में बीआरओ की सभी सड़कों के रखरखाव और उन्नयन पर भी चर्चा की गई। बैठक में जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता बनाए रखने में गुज्जर-बकरवाल और अन्य जनजातियों की भूमिका को मुख्यधारा में लाने के महत्व पर जोर दिया गया।
गुज्जर युवाओं को प्रादेशिक सेना में भर्ती के लिए चलाएं अभियान
मंत्री ने जम्मू-कश्मीर के दूर-दराज के जिलों में भर्ती अभियान/शिविर लगाने और गुज्जर युवाओं को प्रादेशिक सेना में भर्ती करने के लिए गुज्जर रेजिमेंट की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा। क्षेत्र में समान विकास को बढ़ावा देने के लिए राणा ने सागरा गांव में एक खेल स्टेडियम और मेंढर के धना शास्त्री में हेलीपैड के निर्माण में सहयोग का भी प्रस्ताव रखा।