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जम्मू कश्मीर: परिसीमन रिपोर्ट पर भाजपा और नेकां ने दिए सुझाव और आपत्तियां
Tue, 15 Feb 2022 11:20 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Tue, 15 Feb 2022 11:20 AM IST
सार
जम्मू कश्मीर में परिसीमन रिपोर्ट पर भाजपा और नेकां ने अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करवा दी हैं।
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विस्तार
परिसीमन आयोग की मसौदा रिपोर्ट पर भाजपा ने सुझाव और नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) ने आपत्तियां दर्ज करा दी हैं। भाजपा के दोनो सांसदों डॉ जितेंद्र सिंह और जुगल किशोर शर्मा ने अपने सुझाव सोमवार को आयोग की अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को भेज दिए। आयोग ने मसौदा रिपोर्ट पर एसोसिएट सदस्यों को 14 फरवरी तक अपने सुझाव व आपत्तियां दर्ज करवाने का समय दिया था।
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आयोग के एसोसिएट सदस्य एवं जम्मू पुंछ लोकसभा क्षेत्र के सांसद जुगल किशोर शर्मा ने बताया कि मसौदा रिपोर्ट पर उन्होंने अपने सुझाव आयोग की अध्यक्ष को भेज दिए हैं। आयोग ने मसौदा रिपोर्ट को तैयार करने में काफी मेहनत की है। जम्मू हो या कश्मीर संभाग हर क्षेत्र को पर्याप्त राजनीतिक अधिकार मिले। उसका ख्याल रखा गया है। हालांकि अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं के तहत कुछ सुझाव भी आयोग को दिए गए हैं।
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उल्लेखनीय है कि प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रवींद्र रैना ने मसौदा रिपोर्ट पर सुझावो में जम्मू जिले की सुचेतगढ़ विधानसभा सीट को बहाल करने के अलावा परगवाल क्षेत्र को अखनूर विधानसभा में जोड़ने व पुंछ जिले की सभी तीन सीटों को आरक्षित न करते हुए कम से कम एक सीट को ओपन करने का सुझाव अपने सांसदों को दिया था।
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रिपोर्ट की प्रक्रिया में मूलमंत्रों का उल्लंघन किया : नेकां
नेकां सांसद हसनैन मसूदी ने बताया कि पार्टी ने परिसीमन आयोग के ड्राफ्ट पर अपनी आपत्तियां दर्ज करवा दी हैं। दिल्ली में सोमवार को आयोग के समक्ष 15 पेज की रिपोर्ट में ड्राफ्ट का विरोध किया गया है। इसमें सर्वोच्च न्यायालय में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के मामले के विचाराधीन होने के साथ रिपोर्ट की प्रक्रिया में मूलमंत्रों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है।
हसनैन मसूदी ने बताया कि आयोग के समक्ष रखा गया है कि परिसीमन आयोग की प्रक्रिया जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत की गई है, जबकि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है और यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए जब न्यायालय से मामले पर कोई फैसला नहीं सुनाया गया है तो परिसीमन आयोग की प्रक्रिया कैसे हो सकती है। इसके साथ परिसीमन प्रक्रिया में आबादी को प्रमुख रूप से आधार बनाया जाता है, लेकिन आयोग की ड्राफ्ट रिपोर्ट में इसका उल्लंघन किया गया है।
क्षेत्रों में आबादी की असमानता
मसलन डोडा, पाडर, श्री माता वैष्णो देवी आदि क्षेत्रों में आबादी को समानता में नहीं लिया गया है। कहीं आबादी लाखों में है तो कहीं हजारों में, ऐसे में स्थानीय लोगों के साथ कैसे न्याय हो सकता है। इसी तरह तीसरी आपत्ति में कई इलाकों के एक छोर को दूसरे जिलों से जोड़ दिया गया है। जैसे राजोरी के आखिर के कुछ इलाकों को थन्ना मंडी, मेंढर के सुरनकोट, हवेली और अनंतनाग आदि जिलों में भी ऐसे इलाकों का पुनर्गठन कर दिया गया है, जो स्थानीय लोगों के लिए परेशानी और मुश्किलें खड़ी करेगा। इसके अलावा अन्य आपत्तियां भी दर्ज करवाई गई हैं।