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अब दो घंटे पहले पता चल जाएगा बारिश-तूफान का
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जम्मू। श्रीनगर और जम्मू के बाद बनिहाल में अत्याधुनिक डॉप्लर रडार सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इसके लिए पहाड़ी पर बनिहाल टॉप स्थल को चिह्नित किया गया है। डॉप्लर के लिए सामान खरीदा जा रहा है। इसमें सिविल और दूसरे अन्य कार्य जल्द शुरू किए जाएंगे। यह रडार जम्मू और कश्मीर दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा। रडार से सौ किमी हवाई क्षेत्र को कवर करने के साथ दो से तीन घंटे पहले मौसम की सटीक जानकारी मिल सकेगी। भारी बारिश, आंधी, भूस्खलन, बाढ़, बादल फटने जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां पहले मिलने से आपात प्रबंधन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। यह रडार चिनाब घाटी के साथ कश्मीर वैली को कवर करेगा, जिसमें जम्मू संभाग का भी कुछ हिस्सा कवर होगा। इसके साथ बनतालाब जम्मू स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के कार्यालय परिसर में अत्याधुनिक डॉप्लर रडार को ट्रायल पर शुरू किया गया है।
जम्मू-कश्मीर में तीन डॉप्लर रडार सिस्टम शुरू होने से वैष्णो देवी के साथ अमरनाथ यात्रियों को भी समय पूर्व मौसम की सही जानकारी मिल सकेगी। जिससे वे अपनी यात्रा को सुगम बना सकेंगे। जम्मू में स्थापित किया गया रडार सिस्टम जम्मू संभाग के सभी दस जिलों के निचले इलाकों की मौसम संबंधी पूर्व जानकारी देने में सक्षम होगा। हालांकि उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सिग्नल वीक रहने से ऐसी जानकारी कम मिलेगी। एक सामान्य क्लाउड बर्स्ट (बादल फटने) में एक घंटे में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो जाती है, जिससे मौसम संबंधी पूर्व जानकारी न होने के कारण नदी नालों में अचानक तेज बहाव के कारण भारी जानमाल का नुकसान हो जाता है। रडार से ऐसी पूर्व जानकारी मिलने पर जानमाल के नुकसान को कम किया जा सकेगा। मौजूदा मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर की ओर से कटड़ा के मौसम संबंधी अगले चौबीस घंटे के लिए भविष्यभाणी जारी की जाती है, लेकिन दो से तीन घंटे पूर्व किसी आपात चेतावनी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जम्मू संभाग में मौजूदा दस जिलों के लिए नो कास्ट वार्निंग (एनसीडब्ल्यू) सिस्टम नहीं है। वर्ष 2014 में भीषण बाढ़ के बाद श्रीनगर में टाप ऊंचाई पर तोशिबा, जापान निर्मित करोड़ों रुपये का अत्याधुनिक रडार स्थापित किया गया था।
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मौसम संबंधी आपात प्रबंधन मजबूत होगा : निदेशक
मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के निदेशक सोनम लोटस ने बताया कि श्रीनगर और जम्मू के बाद बनिहाल में भी अत्याधुनिक डॉप्लर रडार स्थापित किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में तीन रडार सिस्टम स्थापित होने से मौसम संबंधी आपात प्रबंधन मजबूत होगा। बनिहाल रडार के लिए सामान की खरीद की जा रही है।
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जम्मू-कश्मीर में तीन डॉप्लर रडार सिस्टम शुरू होने से वैष्णो देवी के साथ अमरनाथ यात्रियों को भी समय पूर्व मौसम की सही जानकारी मिल सकेगी। जिससे वे अपनी यात्रा को सुगम बना सकेंगे। जम्मू में स्थापित किया गया रडार सिस्टम जम्मू संभाग के सभी दस जिलों के निचले इलाकों की मौसम संबंधी पूर्व जानकारी देने में सक्षम होगा। हालांकि उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सिग्नल वीक रहने से ऐसी जानकारी कम मिलेगी। एक सामान्य क्लाउड बर्स्ट (बादल फटने) में एक घंटे में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो जाती है, जिससे मौसम संबंधी पूर्व जानकारी न होने के कारण नदी नालों में अचानक तेज बहाव के कारण भारी जानमाल का नुकसान हो जाता है। रडार से ऐसी पूर्व जानकारी मिलने पर जानमाल के नुकसान को कम किया जा सकेगा। मौजूदा मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर की ओर से कटड़ा के मौसम संबंधी अगले चौबीस घंटे के लिए भविष्यभाणी जारी की जाती है, लेकिन दो से तीन घंटे पूर्व किसी आपात चेतावनी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जम्मू संभाग में मौजूदा दस जिलों के लिए नो कास्ट वार्निंग (एनसीडब्ल्यू) सिस्टम नहीं है। वर्ष 2014 में भीषण बाढ़ के बाद श्रीनगर में टाप ऊंचाई पर तोशिबा, जापान निर्मित करोड़ों रुपये का अत्याधुनिक रडार स्थापित किया गया था।
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मौसम संबंधी आपात प्रबंधन मजबूत होगा : निदेशक
मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के निदेशक सोनम लोटस ने बताया कि श्रीनगर और जम्मू के बाद बनिहाल में भी अत्याधुनिक डॉप्लर रडार स्थापित किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में तीन रडार सिस्टम स्थापित होने से मौसम संबंधी आपात प्रबंधन मजबूत होगा। बनिहाल रडार के लिए सामान की खरीद की जा रही है।
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