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सरकारी खजाने से करोड़ो मिलने पर भी 10 स्वायत्त संस्थाओं ने नहीं कराया ऑडिट
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जम्मू। पूर्ववर्ती विशेष दर्जे वाले जम्मू-कश्मीर की दस स्वायत्त संस्थाआें ने सरकारी खजाने से मिले करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद ऑडिट ही नहीं करवाया। संसद में पेश रिपोर्ट में नियंत्रक एवं महा लेखा परीक्षक (सीएजी) ने इसे गंभीर स्थिति करार दिया। लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद की लेह और कारगिल दोनों संस्थाओं ने कभी भी सीएजी को अपने खातों का ब्योरा नहीं दिया।
इसी तरह से जम्मू-कश्मीर के दोनों कृषि विश्वविद्यालयों स्कॉस्ट जम्मू व स्कॉस्ट कश्मीर, जम्मू-कश्मीर हाउसिंग बोर्ड, राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, खादी एवं ग्रोमोद्योग बोर्ड, कंपनसेंट्री अफॉरेस्टेशन मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी (कैंपा), भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड और कर्मचारी भविष्य निधि बोर्ड श्रीनगर ने कई वर्षों से सीएजी से ऑडिट नहीं करवाया है।
हाल ही में संसद में मार्च 2019 अंत की पेश की गई सीएजी रिपोर्ट में इस स्थिति को चिंताजनक बताया है। लद्दाख की दोनों स्वायत्त संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा है कि लद्दाख की लेह परिषद का गठन वर्ष 1995-96 में किया गया, लेकिन कभी भी सीएजी से ऑडिट नहीं करवाया गया। इसी तरह से कारगिल परिषद वर्ष 2004-05 में वजूद में आई। इस संस्था का भी यही हाल रहा। दोनाें परिषदों को विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये मिलते रहे। जो राशि खर्च नहीं की जाती, उसे नॉन लैप्सेबल श्रेणी में डालकर दोनों परिषदों के खाते में स्थानांतरित किया जाता रहा। लेह परिषद को साल 2018-196 में 546.24 करोड़ जबकि कारगिल को 597.95 करोड़ का अनुदान दिया गया। इसके बावजूद ऑडिट नहीं करवाना कई सवाल खड़े करता है। जम्मू-कश्मीर की अन्य आठ स्वायत्त संस्थाआें का भी कई वर्षों से ऑडिट न होना चिंताजनक है।
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स्वायत्त संस्था - कब से नहीं कराया ऑडिट
स्कॉस्ट कश्मीर - 9 वर्ष
स्कॉस्ट जम्मू - 3 वर्ष
कैंपा - 10 साल
राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण - एक वर्ष
खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड - 4 वर्ष
जेके हाउसिंग बोर्ड - 7 वर्ष
भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड - 6 वर्ष
कर्मचारी भविष्य निधि बोर्ड श्रीनगर - 4 वर्ष
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सीएजी की सिफारिशों
पर अमल में भी सुस्ती
जम्मू। सीएजी ने जम्मू-कश्मीर में जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सीएजी के निरीक्षण में जो भी खामियां मिलती हैं, उसे चिह्नित कर संबंधित विभाग को दुरुस्त करने को कहा जाता है, लेकिन बड़े पैमाने पर अनुशंसाएं अमल में नहीं लाई जा रहीं। 31 मार्च 2019 तक सीएजी की 11,531 निरीक्षण रिपोर्टों में की गईं 49,523 अनुशंसाएं अभी तक लंबित हैं। इन पर सरकार को अवधि निर्धारित कर अमल सुनिश्चित करना चाहिए। जम्मू-कश्मीर में 2018-19 में सीएजी ने 727 ड्राईंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर, 74 इकाइयों और 25 स्वायत्त संस्थाओं का ऑडिट किया था।
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इसी तरह से जम्मू-कश्मीर के दोनों कृषि विश्वविद्यालयों स्कॉस्ट जम्मू व स्कॉस्ट कश्मीर, जम्मू-कश्मीर हाउसिंग बोर्ड, राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, खादी एवं ग्रोमोद्योग बोर्ड, कंपनसेंट्री अफॉरेस्टेशन मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी (कैंपा), भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड और कर्मचारी भविष्य निधि बोर्ड श्रीनगर ने कई वर्षों से सीएजी से ऑडिट नहीं करवाया है।
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हाल ही में संसद में मार्च 2019 अंत की पेश की गई सीएजी रिपोर्ट में इस स्थिति को चिंताजनक बताया है। लद्दाख की दोनों स्वायत्त संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा है कि लद्दाख की लेह परिषद का गठन वर्ष 1995-96 में किया गया, लेकिन कभी भी सीएजी से ऑडिट नहीं करवाया गया। इसी तरह से कारगिल परिषद वर्ष 2004-05 में वजूद में आई। इस संस्था का भी यही हाल रहा। दोनाें परिषदों को विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये मिलते रहे। जो राशि खर्च नहीं की जाती, उसे नॉन लैप्सेबल श्रेणी में डालकर दोनों परिषदों के खाते में स्थानांतरित किया जाता रहा। लेह परिषद को साल 2018-196 में 546.24 करोड़ जबकि कारगिल को 597.95 करोड़ का अनुदान दिया गया। इसके बावजूद ऑडिट नहीं करवाना कई सवाल खड़े करता है। जम्मू-कश्मीर की अन्य आठ स्वायत्त संस्थाआें का भी कई वर्षों से ऑडिट न होना चिंताजनक है।
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स्वायत्त संस्था - कब से नहीं कराया ऑडिट
स्कॉस्ट कश्मीर - 9 वर्ष
स्कॉस्ट जम्मू - 3 वर्ष
कैंपा - 10 साल
राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण - एक वर्ष
खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड - 4 वर्ष
जेके हाउसिंग बोर्ड - 7 वर्ष
भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड - 6 वर्ष
कर्मचारी भविष्य निधि बोर्ड श्रीनगर - 4 वर्ष
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सीएजी की सिफारिशों
पर अमल में भी सुस्ती
जम्मू। सीएजी ने जम्मू-कश्मीर में जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सीएजी के निरीक्षण में जो भी खामियां मिलती हैं, उसे चिह्नित कर संबंधित विभाग को दुरुस्त करने को कहा जाता है, लेकिन बड़े पैमाने पर अनुशंसाएं अमल में नहीं लाई जा रहीं। 31 मार्च 2019 तक सीएजी की 11,531 निरीक्षण रिपोर्टों में की गईं 49,523 अनुशंसाएं अभी तक लंबित हैं। इन पर सरकार को अवधि निर्धारित कर अमल सुनिश्चित करना चाहिए। जम्मू-कश्मीर में 2018-19 में सीएजी ने 727 ड्राईंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर, 74 इकाइयों और 25 स्वायत्त संस्थाओं का ऑडिट किया था।