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जम्मू कश्मीर: प्रदेश में चार हजार से अधिक ग्राम रक्षा समूह तैनात, नाम और संरचना में हुआ ये बदलाव

Mon, 09 Oct 2023 06:12 PM IST
kumar गुलशन कुमार पीटीआई, जम्मू कश्मीर
पीटीआई, जम्मू कश्मीर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Mon, 09 Oct 2023 06:12 PM IST
सार

जम्मू कश्मीर सरकार ने ग्राम रक्षा समूह (वीडीएस) योजना को अधिसूचित किया। इस योजना में बीते साल संशोधित कर फिर अधिसूचित किया गया है। अब इनके नाम के साथ संरचना में बदलाव किया गया है।

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Jammu Kashmir: More than four thousand village defense groups and thirty thousands spo deployed in jk
ग्राम सुरक्षा गार्ड को हथियार प्रशिक्षण देते हुए (फाइल) - फोटो : संवाद

विस्तार

आतंक रोधी अभियान के तहत  जम्मू कश्मीर के नागरिकों की रक्षा के  प्रदेश में 4,153 ग्राम रक्षा समूह (वीडीजी) और 32,355 विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) तैनात किए गए हैं। पहले वीडीजी को ग्राम रक्षा समिति कहा जाता था। अब इनके नाम के साथ संरचना में बदलाव किया गया है।

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गृह मंत्रालय (एमएचए) की 2022-23 की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग तीन दशकों से सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद और अलगाववादी हिंसा से प्रभावित रहा है। इस सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए जम्मू कश्मीर सरकार ने 1995 में ग्राम रक्षा समूह (वीडीएस) योजना को अधिसूचित किया। इस योजना को 14 अगस्त 2022 को संशोधित कर फिर अधिसूचित किया गया है। इसमें बदलाव के बाद ग्राम रक्षा समूह के सदस्यों को ग्राम रक्षा गार्ड के रूप में नामित किया गया है। वर्तमान में ग्राम रक्षा समूह की स्वीकृत संख्या 4,985 है, जिनमें से 4,153 ग्राम रक्षा समूहों का गठन किया गया है।
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कैसे हुआ समिति का गठन

अधिकारियों ने कहा कि वीडीसी की स्थापना का विचार 1965 और 1971 के युद्धों में पाकिस्तानी घुसपैठ और जासूसी को रोकने के लिए पूर्व सैन्य कर्मियों को हथियारबंद करने के लिए किया गया था। लगातार आतंकवादी खतरों का सामना कर रहे ग्रामीणों को आत्मरक्षा क्षमता प्रदान करने के लिए जम्मू संभाग में वीडीसी का गठन किया गया था।
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योजना के तहत प्रत्येक वीडीसी में प्रभारी के रूप में एक विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) होता था और 10-15 अन्य स्वयंसेवक सदस्य होते थे, जिनमें ज्यादातर पूर्व-सेवा कर्मी होते थे। उन्हें .303 राइफलें और गोला-बारूद दिया गया। वीडीसी के प्रभारी एसपीओ को भुगतान किया जाता था, जबकि बाकी स्वयंसेवक होते थे।

अभी क्या हुआ बदलाव

2020 में ग्राम रक्षा समितियों को नया रूप दिया गया और ग्राम रक्षा समूहों की शुरुआत की गई, जिनके सदस्यों को ग्राम रक्षा गार्ड (वीडीजी) कहा जाता है। नाम के साथ ही समितियों की संरचना में भी बदलाव किया गया है। वीडीसी के विपरीत जहां केवल एसपीओ को भुगतान किया जाता था, अब सभी वीडीजी को भुगतान किया जाता है।

अधिकारियों ने कहा कि अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में, वीडीजी को 4,500 रुपये प्रति माह का भुगतान किया जाता है, जबकि अन्य को 4,000 रुपये प्रति माह की समान दर से भुगतान किया जाता है। वीडीजी जिला पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की देखरेख में कार्य करते हैं। एमएचए की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) की स्वीकृत संख्या 34,707 है, जिनमें से 32,355 एसपीओ नियुक्त हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा उन्हें सौंपे गए विभिन्न कार्यों में उनका नेतृत्व और मार्गदर्शन किया जाता है।

कब हुई विशेष पुलिस अधिकारियों की शुरुआत

जम्मू-कश्मीर में विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) की संस्था 1995 से शुरू की गई थी। एसपीओ के निर्माण की मूल अवधारणा आतंकवाद के खिलाफ अभियान में कानून लागू करने वाली एजेंसियों को सहायक सहायता प्रदान करना और स्थानीय आबादी को अपनी सुरक्षा के लिए शामिल करना और साथ ही आतंकवाद के खतरे को रोकने में जम्मू और कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की मदद करना था।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के एसपीओ का पारिश्रमिक निम्नलिखित तरीके से 18,000 रुपये प्रति माह तक बढ़ाया गया है। तीन साल से कम अनुभव वाले एसपीओ को 6,000 रुपये का भुगतान किया जाता है, तीन साल से अधिक और 5 साल से कम अनुभव वाले एसपीओ को 9,000 रुपये का भुगतान किया जाता है।

पांच साल से अधिक और 10 साल से कम अनुभव वाले एसपीओ को 12,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। 10 साल से अधिक और 15 साल से कम अनुभव वाले एसपीओ को 15,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले एसपीओ को 18,000 रुपये का भुगतान किया जाता है।

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