जम्मू कश्मीर: किश्तवाड़ के मचैल में घर पूरी तरह बर्फबारी में दबे, लोग सुखाई सब्जियां और आलू खाकर चला रहे काम
किश्तवाड़ जिले के पाडर उपमंडल के दूरदराज के गांव में छह फुट तक बर्फ जमने के कारण जनजीवन प्रभावित है। यहां रहने वाले लोगों का दिन में भी घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। तहसील के करीब सात गांवों की 18 सौ से अधिक आबादी प्रभावित है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
किश्तवाड़ जिले के पाडर उपमंडल की दूरदराज तहसील मचैल में पांच से छह फुट बर्फ के बीच जनजीवन प्रभावित है। इस पहाड़ी इलाके में लोगों के सामने पहाड़ सी जिंदगी है। दिन में भी घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। छह माह से लाइट नहीं आई है। पानी जम गया है। ग्रामीण सुखाई सब्जियां, राजमा और आलू खाकर जीवन की गाड़ी चला रहे हैं।
तहसील के करीब सात गांवों की 18 सौ से अधिक आबादी प्रभावित है। आलू और राजमा की फसल भी बर्फ में दबकर नष्ट हो गई है। ये परेशानियां मचैल गांव ही नहीं, हलौती, हांगो, चिशोती, हमोरी आदि में भी हैं। यह इलाका जिला मुख्यालय से 92 किलोमीटर दूर है। यहां मंगलवार को भी दिन भर मौसम खराब रहा।
चंद पलों के लिए ही धूप निकली। मवेशी भी घरों में ही बंद हैं, चारे का प्रबंध नहीं हो पा रहा। मकानों की छतें बर्फ में दबी पड़ी हैं। एक स्थानीय सरकारी बैंक कर्मचारी का कहना है कि यहां का जीवन रामभरोसे ही है। माता चंडी का नाम लेकर जीवन जी रहे हैं। न बिजली है और न पानी मिल पा रहा है।
जिनके पास जेनरेटर हैं वे तो बिजली देखते हैं अन्यथा रात्रि को पुराने जमाने की तरह लकड़ी की धीनी जलानी पड़ती है। लोगों के पास सोलर तो हैं, लेकिन धूप न निकलने से ये भी चार्ज नहीं हो पा रहे। माइनस डिग्री से नीचे पारे में कहीं जाना पड़ जाए तो बहुत कठिन होता है।
सड़क तो बन रही, कब तैयार होगी पता नहीं
स्थानीय निवासी संसार चंद, राजू व संजीव आदि का कहना है कि यहां सड़क बन रही है, वह भी कब तैयार होगी, कुछ पता नहीं। हमने बिजली अगस्त के महीने में ही देखी थी। जब मचैल यात्रा चली थी उसके बाद यात्रा के साथ ही बिजली भी गुल हो गई।
कुंडेल का पुल यात्रा के साथ ही उठा लिया गया। हम लोग अभी भी खुद को प्राचीन सभ्यता वाले ही मानते हैं। मचैल यात्रा के लिए यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं। पर्यटन के लिहाज से भी सरकार को इस इलाके का विकास करना चाहिए।